हम कौन है?
प्रजातन्त्र में जिनके पास शक्तियां और जिम्मेदारियां होती है वे अपने कार्यों के प्रति जवाहदेह होने चाहिए। इस उद्देश्य हेतु संविधान ने कई संस्थागत तंत्र जैसे न्यायापालिका, सर्तकता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था (साई) को अधिदेशित किया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक और भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएडी) इसके अंतर्गत कार्य करते हुए भारतीय सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था को गठित करते हैं। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखापरीक्षक के रूप में अधिदेशित किया है। इस प्रकार हम जिम्मेदारी सुनिश्चिात करने के लिए एक यंत्र हैं। सविधान का अनुच्छेद 149-151 सीएजी की विशेष भूमिका निर्धारित करती है।
सीएजी की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चियत की गई है?
संविधान निम्नलिखित रूप से सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा की स्वतंत्र और निष्परक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है: भारत के राष्ट्र पति द्वारा सीएजी की नियुक्ति पदच्यूति हेतु विशेष प्रक्रिया (जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश) भारत की समेकित निधि से वेतन और प्रभारित व्यय (दत्त मत) उनकी कार्य अवधि समाप्त होने के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में कार्य करने की अनुमति न होना।
सीएजी के क्या कर्त्तव्य है?
जैसा संविधान के अनुच्छेद 149 में उल्लेखित है संसद ने 1971 में सीएजी के कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम नामक एक विस्तृत विधान को अधिनियमित किया जो उनके अधिदेश का वर्णन करता है और सरकार (केंद्र और राज्य) के लगभग प्रत्येक व्यय राजस्व संग्रहण या सहायता/अनुदान प्राप्त करने वाली इकाई उनकी लेखापरीक्षा के अंतर्गत आती हैं। उनका कर्तव्य अग्रलिखित की लेखापरीक्षा करना और उस पर रिपोर्ट तैयार करना है:
अपनी भूमिका निभाने के लिए सीएजी की क्या शक्तियां है?
उनके विस्तृत लेखापरीक्षा अधिदेश का प्रयोग निर्बाध रूप से करने के क्रम में अधिनियम का प्रावधान करता है: उनके लेखापरीक्षा के अधीन किसी कार्यालय या संगठन के निरीक्षण करने की शक्ति। सभी लेन-देनों की जांच और कार्यकारी से प्रश्नष करने की शक्ति। किसी भी लेखापरीक्षित सत्त्व से कोई भी रिकार्ड, पेपर, दस्तावेज मांगने की शक्ति। लेखापरीक्षा की सीमा और स्व रूप पर निर्णय लेने की शक्ति।
हम कितने प्रकार के लेखापरीक्ष करते हैं?
लेखापरीक्षा के उद्देश्योंक के आधार पर हम सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा को निम्नलिखित में वर्गीकृत करते है: अनुपालन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है) वित्तीय सत्यापन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है) निष्पायदन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है) इन परम्परागत लेखापरीक्षा के अतिरिक्त, हम सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रणाली और पर्यावरण मामलों पर भी कई सफल लेखापरीक्षा कर चुके हैं।
किस प्रकार के प्रतिवेदन सीएजी प्रस्तुत करता है?
संसद और राज्य विधान मंडलों में प्रस्तुत की गई सीएजी की लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों में राजस्व संग्रहण और सरकार के व्यय को कवर करते हुए अनुपालना और निष्पाईदन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, विधान द्वारा प्रावधान किए गए कुछ स्वायत्त निकायों की कार्य प्रणाली पर पृथक लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, संघ और राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिवेदन और संसद और विधान मंडलों द्वारा पारित किये गये विनियोजन अधिनियमों के अनुपालन पर प्रतिवेदन शामिल होते हैं। सीएजी राज्य विधान मंडलों में राज्यों के प्रमाणित वार्षिक लेखे भी प्रस्तुत करता है जिन्हें वित्त और विनियोजन लेखे कहा जाता है।
हमारे प्रतिवेदन का केंद्र बिंदु क्या है?
लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में अंतिम, पूर्णत: परिपुष्टे लेखापरीक्षा निष्क र्ष होते हैं। ये विभाग द्वारा स्वीकृत की गई है और/या तथ्यातत्मक रूप से साबित की गई और विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। हमारी लेखापरीक्षा का उद्देश्य प्रबंधन में और सरकारी गतिविधियों और कार्यक्रमों में सुधार करना है। हम पहचानी गई त्रुटियों की प्रकृति को सुनिश्चिनत करते हैं कि वे एकाकी या पुनरावर्ती प्रकार की है। हम न केवल सुधारात्मक कार्रवाई को प्रेरित करना चाहते हैं अपितु यह भी सुनिश्चितत करना चाहते हैं कि दोबारा गलती न दोहराई जाये। हम कार्यप्रद्धति, प्रक्रियाएं और प्रसंस्करणों को सुधारने के लिए उचित, सूचित और कार्यान्वयन योग्य सिफारिशें करते हैं।
लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों का क्या होता हैं?
संघ के मामले में सीएजी के प्रतिवेदन राष्ट्रशपति को और राज्य मामले में राज्यपाल को प्रस्तुत किये जाते हैं जो उन्हें सदन के समक्ष प्रस्तुत करता है। एक बार सदन में प्रस्तुत किये जाने के बाद, प्रतिवेदन लोक लेखा समिति (पीएसी)/लोक उपक्रम समिति (कोपू) की केंद्रीय और राज्य स्थाई समितियों को स्थाई रूप से संदर्भित हो जाते हैं। ये विशिष्टम समितियां वार्षिक लेखे और उनपर लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की समयबद्ध और गहन संवीक्षा उपलब्ध करवाने के लिए गठित की गई हैं। समितियां लोक हित के सर्वाधिक महत्वपूर्ण निष्कीर्षों और सिफारिशों को हमारे प्रतिवेदनों से चुनते है और उन पर अपनी सुनवाईयों रखते हैं। हम इस कार्य में इन समितियों को अपना तकनीकी सहायता करते हैं। समितियों की सुनवाईयों पर, कार्रवाई/गैर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार कार्यकारी को बुलाया जा सकता है। उनकी जांच के आधार पर, समिति अपने प्रतिवेदन तैयार करते है और विधान मंडल को प्रस्तुत करते है जो समिति की सुनवाईयों, कार्यकारी द्वारा की गई कार्रवाई और प्रशासनिक प्रथाओं और कार्यप्रणालियों को सुधारने के लिए सिफारिशों को शामिल कर सारबद्ध करती है।
सीएजी अपनी भूमिका कैसे निभाता है?
सीएजी का अपनी संविधानात्मक भूमिका को निभाने के लिए भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएंडएडी) द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। आईएएंडएडी के शीर्ष और मध्यर प्रबंधकीय स्तर पर लगभग 600 भारतीय लेखा और लेखापरीक्षा सेवा (आईएएंडएएस) अधिकारी हैं। उन्हें या तो यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा द्वारा सीधे नियुक्त किया जाता है या ग्रुप बी (पर्यवेक्षण स्टाफ) से पदोन्नत कर शामिल किया जाता है। कुछ अधीनस्थ संवर्ग भी है जिनकी संख्याै लगभग 47000 है। इसमें राजपत्रित पर्यवेक्षण संवर्ग (ग्रुप बी) में वरिष्ठव लेखापरीक्षा/लेखाअधिकारी, लेखापरीक्षा अधिकारी और सहायक लेखापरीक्षा अधिकारी तथा सहायक स्टाफ संवर्ग (ग्रुप सी) शामिल हैं।
आईएएंडएडी कैसे संगठित किया गया है?
सीएजी का कार्यालय, नई दिल्ली लेखापरीक्षा, लेखा और आईएएंडएडी के हकदारी कार्यों से संबंधित सभी गतिविधियों को निदेशित, मॉनीटर और नियंत्रित करता है। क्षेत्रीय स्तर पर 133 कार्यालय है: प्रत्येक राज्य में महालेखाकार/लेखापरीक्षा का कार्यालय लेखापरीक्षा के लिए उत्तरदायी है, राज्य लेखे के संकलन के लिए हकदारी का पालन करने के लिए महालेखाकार (ले. व ह.) का कार्यलय, सभी सिविल मंत्रालयों और विभागों रक्षा, रेलवे, डाक और दूरसंचार सहित संघ गतिविधियों की लेखापरीक्षा हेतु प्रधान निदेशक लेखापरीक्षा उत्तरदायी है, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की लेखापरीक्षा का कार्य सदस्य लेखापरीक्षा बोर्ड के कार्यालय को सौंपा गया है। विदेशों में भारतीय मिशन की लेखापरीक्षा के लिए विदेश स्थित कार्यालय।
IA & AD में काम करने वाला एक अधिकारी प्रशिक्षण के लिए कैसे नामांकित होता है?
क्षेत्रीय सलाहकार समिति (आरएसी) द्वारा अंतिम रूप से प्रशिक्षित प्रशिक्षण कार्यक्रम (सीओटीपी) के वार्षिक कैलेंडर में शामिल एक कोर्स के लिए प्रशिक्षुओं का नामांकन उपयोगकर्ता कार्यालयों द्वारा किया जाता है।
क्या IAAD में काम करने वाला कोई बाहरी व्यक्ति आर.सी.बी.के.आई, शिलांग में प्रशिक्षित नहीं हो सकता है?
यह संस्थान आम तौर पर केवल भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग में काम करने वाले कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है। हालांकि, विशेष मामलों में, राज्य सरकार और सरकारी संगठनों के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण भी आयोजित किए जाते हैं।
आर.सी.बी.के.आई, शिलांग के उपयोगकर्ता कौन से कार्यालय हैं?
आर.सी.बी.के.आई, शिलांग के कुल सोलह उपयोगकर्ता कार्यालय हैं। ये भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के कार्यालय असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में स्थित हैं।
इन आर.सी.बी.के.आई/ आर.सी.बी.के.सी. में कौन प्रशिक्षित हैं?
ये क्षेत्रीय क्षमता निर्माण एवं ज्ञान संस्थान देश के विभिन्न राज्यों में स्थित IA & AD के विभिन्न कार्यालयों की क्षमता निर्माण आवश्यकताओं को पूरा करता है। प्रत्येक आर.सी.बी.के.आई के पास अपने उपयोगकर्ता कार्यालयों का अपना सेट है, जहां वे क्षमता विकास क्षेत्रों में प्रशिक्षण और सहायता प्रदान करते हैं। गैर IAAS समूह A, समूह B और IA & AD के समूह C के अधिकारियों को इन आर.सी.बी.के.आई/ आर.सी.बी.के.सी. में प्रशिक्षित किया जाता है। कभी-कभी, IAAS अधिकारी आर.सी.बी.के.आई/ आर.सी.बी.के.सी. में प्रशिक्षित होते हैं।
आर.सी.बी.के.आई क्या है?
आर.सी.बी.के.आई भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के क्षेत्रीय क्षमता निर्माण एवं ज्ञान संस्थान के लिए एक सुविधा है। इस विभाग में कुल दस ऐसे आर.सी.बी.के.आई हैं। आर.सी.बी.के.आई, IA & AD के क्षमता निर्माण, अनुसंधान और विकास कार्यों को पूरा करता है। दस आर.सी.बी.के.आई के अलावा, दिल्ली और बेंगलुरु में दो क्षेत्रीय क्षमता निर्माण एवं ज्ञान केंद्र (आर.सी.बी.के.सी) भी हैं।
लेखापरीक्षकों की लेखापरीक्षा कौन करता है?
भारत के सीएजी कार्यालय में एक आंतरिक निरीक्षण विंग है जो समय-समय पर देश में स्थित लेखा परीक्षा और लेखा कार्यालयों का निरीक्षण करता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके पास पर्याप्त प्रशासनिक और तकनीकी नियंत्रण हैं और वे उनका प्रभावी ढंग से अनुपालन करते हैं। इसके अतिरिक्त, सीएजी में 'पीयर रिव्यू ’ की एक प्रणाली है अर्थात् एक इकाई द्वारा एक समान स्टैंड की एक अन्य इकाई द्वारा किए गए कार्य की समीक्षा। लेखापरीक्षा कार्यालयों की पीयर रिव्यू, अन्य समान लेखा परीक्षा कार्यालयों के प्रमुखों द्वारा की जाती है। यह सुनिश्चित करता है कि लेखापरीक्षा कार्य को प्रभावी ढंग से और योजनाबद्ध तरीके से निष्पादित किया जाता है और लेखापरीक्षा प्रोडक्ट, संगठन के बैंचमार्क और हितधारकों की जरूरतों को पूरा करते है।
भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा विभाग कैसे संगठित किया जाता है?
सीएजी का कार्यालय, नई दिल्ली लेखापरीक्षा, लेखा और आईएएंडएडी के हकदारी कार्यों से संबंधित सभी गतिविधियों को निर्देशित, मॉनीटर और नियंत्रित करता है। क्षेत्रीय स्तर पर अनेक कार्यालय है जैसेः
• प्रत्येक राज्य में महालेखाकार (लेखापरीक्षा) का कार्यालय लेखापरीक्षा के लिए उत्तरदायी है,
• राज्य लेखे के संकलन के लिए एवं हकदारी कार्यों का पालन करने के लिए महालेखाकार (लेखा एवं हक.) का कार्यालय,
• सभी सिविल मंत्रालयों और विभागों रक्षा, रेलवे, डाक और दूरसंचार सहित संघीय गतिविधियों की लेखापरीक्षा हेतु प्रधान निदेशक, लेखापरीक्षा उत्तरदायी है,
• केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की लेखापरीक्षा का कार्य सदस्य, लेखापरीक्षा बोर्ड के कार्यालय को सौंपा गया है।
• विदेशों में भारतीय मिशन की लेखापरीक्षा के लिए विदेश स्थित कार्यालय।
सीएजी अपनी भूमिका कैसे निभाता है?
सीएजी का अपनी संविधानात्मक भूमिका को निभाने के लिए भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएंडएडी) द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। आईएएंडएडी के शीर्ष और मध्यम प्रबंधकीय स्तर पर, भारतीय लेखा और लेखापरीक्षा सेवा (आईएएंडएएस) के अधिकारी हैं। उन्हें या तो यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा द्वारा सीधे नियुक्त किया जाता है या ग्रुप बी (पर्यवेक्षण स्टाफ) से पदोन्नत कर शामिल किया जाता है। कुछ अधीनस्थ संवर्ग भी है जिनमें राजपत्रित पर्यवेक्षण संवर्ग (ग्रुप ए) में वरिष्ठ लेखापरीक्षा अधिकारी और सहायक लेखापरीक्षा अधिकारी (ग्रुप बी) तथा सहायक स्टाफ संवर्ग (ग्रुप सी) शामिल हैं।
पीएसी/सी.ओ.पी.यू./एल.बी. की बैठकों में सीएजी का क्या भूमिका है?
सीएजी और उसके अधिकारी राज्य विधानसभाओं की पीएसी के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी रिपोर्ट आम तौर पर समितियों के काम करने का आधार बनती है। सीएजी या उनके अधिकारी गहन परीक्षण के लिए ऑडिट पैराग्राफ के चयन में समिति के सदस्यों की सहायता करते हैं। वह उन विभागीय प्रत्युत्तर की जांच करते है जो विभाग समितियों को सौंपते हैं। वे समितियों को विभाग द्वारा किए गए प्रस्तुतिकरण की सत्यता की जांच करने में मदद करते हैं और उनकी मसौदा प्रतिवेदन में तथ्यों और आंकड़ों की शुद्धता की जांच करने में भी उनकी मदद करते हैं।
लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों का क्या होता है?
संघ के मामलें में सीएजी के प्रतिवेदन राष्ट्रपति को और राज्य मामलों में राज्यपाल को प्रस्तुत किये जाते हैं जो उन्हें सदन के समक्ष प्रस्तुत करता है। एक बार सदन में प्रस्तुत किये जाने के बाद, प्रतिवेदन लोक लेखा समिति (पीएसी)/लोक उपक्रम समिति (कोपू) की केंद्रीय और राज्य स्थाई समितियों को स्थाई रूप से संदर्भित हो जाते हैं। ये विशेषज्ञ समितियां वार्षिक लेखे और उनपर लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की समयबद्ध और गहन संवीक्षा उपलब्ध करवाने के लिए गठित की गई हैं। समितियां लोक हित के सर्वाधिक महत्वपूर्ण निष्कर्षों और सिफारिशों को हमारे प्रतिवेदनों से चुनते है और उन पर अपनी सुनवाई रखते हैं। हम इस कार्य में इन समितियों को अपनी तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं। समितियों की सुनवाई के समय, कार्रवाई/गैर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार कार्यकारी को बुलाया जा सकता है। उनकी जांच के आधार पर, समिति अपने प्रतिवेदन तैयार करती है और विधान मंडल को प्रस्तुत करती है जो समिति की सुनवाईयों, कार्यकारी द्वारा की गई कार्रवाई और प्रशासनिक प्रथाओं और कार्यप्रणालियों को सुधारने के लिए की गई सिफारिशों को शामिल कर सारबद्ध करती है।
मसौदा पैराग्राफ क्या हैं?
लेखापरीक्षा निरीक्षण से उत्पन्न होने वाले मुख्य लेखापरीक्षा निष्कर्षों को सीएजी की लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, जिसे विधान सभा में प्रस्तुत करना होता है में शामिल करने के लिए मसौदा पैराग्राफ के रूप में संसाधित किया जाता है। लेखापरीक्षा कार्यालय, प्रस्तावित मसौदा पैराग्राफ को राज्य सरकार के संबंधित विभागाध्यक्षों को उनके नाम से भेजते है जिसका छह सप्ताह की अवधि के भीतर सरकार द्वारा उत्तर देना होता हैं। मसौदा पैराग्राफ को अंतिम रूप देने से पहले सरकार के उत्तरों पर विचार किया जाता है। उन मामलों में जहां उत्तर संतोषजनक हैं, मसौदा पैराग्राफ को लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में शामिल नहीं किया जाता हैं।
क्या लेखापरीक्षा कार्यालयों द्वारा निरीक्षण प्रतिवेदन में शामिल आक्षेपों का अनुसरण किया गया है? यदि हां, तो कैसे?
निरीक्षण प्रतिवेदन के प्रत्युत्तर में लेखापरीक्षित इकाइयों से प्राप्त उत्तरों की लेखापरीक्षा कार्यालयों में जांच की जाती है और संतोषजनक पाए जाने पर आक्षेपों का निपटान किया जाता है। लेखापरीक्षा कार्यालयों द्वारा बकाया निरीक्षण प्रतिवेदनों/आक्षेपों के संबंध में समय-समय पर अनुस्मारक जारी किए जाते हैं। लेखापरीक्षा समिति की बैठकों के दौरान लेखापरीक्षा आक्षेपों पर लेखापरीक्षा कर्मियों और ऑडिट के प्रतिनिधियों के बीच चर्चा की जाती है और उनका निपटान किया जाता है। आगामी लेखापरीक्षा के समय भी, ऐसे आक्षेप जिनका निपटान नहीं हुआ, की लेखापरीक्षा दल दवारा समीक्षा की जाती है। संक्षेप में, निरीक्षण प्रतिवेदन में शामिल लेखापरीक्षा आक्षेपों का उनके अंतिम निपटान होने तक अनुसरण किया जाता है।
निरीक्षण प्रतिवेदन क्या है?
लेखापरीक्षा निरीक्षण के परिणामों से एक प्रतिवेदन, जिसे निरीक्षण प्रतिवेदन के रूप में जाना जाता है, संबंधित लेखापरीक्षित इकाई के प्रभारी अधिकारी को एक निर्धारित समय अवधि के भीतर लेखापरीक्षा निष्कर्षों पर लिखित उत्तर प्रस्तुत करने के अनुरोध के साथ औपचारिक रूप से अवगत करवाया जाता है।
लेखापरीक्षा योजना क्या है? यह कैसे तैयार की जाती है?
लेखापरीक्षा योजना एक वार्षिक लेखापरीक्षा कार्यक्रम है, जो कि वर्ष के दौरान लेखापरीक्षा संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर आगामी वित्तीय वर्ष के दौरान लेखापरीक्षित की जानी वाली इकाइयों और योजनाओं/कार्यक्रमों को निर्दिष्ट करता है। प्रतिवर्ष, प्रत्येक लेखापरीक्षा कार्यालय विस्तृत जोखिम विश्लेषण के आधार पर एक औपचारिक लेखापरीक्षा योजना तैयार करता है जिसमें व्यय की मात्रा, आंतरिक नियंत्रण का स्तर, पिछले लेखापरीक्षा आक्षेप, मीडिया रिपोर्ट, विभागों द्वारा की गई योजनाएँ और अन्य मापदंड शामिल होते हैं। योजना में लेखापरीक्षा और लेखापरीक्षा संसाधनों के आवंटन के लिए प्रस्तावित लेखापरीक्षित इकाइयों की पहचान की जाती है। लेखा परीक्षा योजना के उद्देश्य हैं:
हितधारकों को उचित आश्वासन प्रदान करना कि लेखापरीक्षा प्राथमिकताओं को तय करते समय सभी उचित जोखिमों को शामिल किया गया है;
वर्तमान मुद्दों और दबाव क्षेत्रों पर विशेष जोर देने के साथ अनिवार्य और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों/उपक्रमों (विभागों, कार्यक्रमों/योजनाओं/परियोजनाओं आदि) को शामिल करने के लिए लेखापरीक्षा कार्य को प्राथमिकता देना;
यदि आवश्यक हो, विशेषज्ञों की सेवाओं का उपयोग करके पर्याप्त पर्यवेक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करके लेखापरीक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना;
लेखापरीक्षा माहौल में बदलाव के कारण लेखापरीक्षा के लिए नई और उभरती चुनौतियों पर विशेष ध्यान देना।
हमारे प्रतिवेदन का केन्द्र बिन्दु क्या है?
लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में अंतिम, पूर्णत: संपुष्ट लेखापरीक्षा निष्कर्ष होते हैं। ये विभाग द्वारा स्वीकृत की गई है और/या तथ्यातत्मक रूप से साबित की गई और विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। हमारी लेखापरीक्षा का उद्देश्य प्रबंधन में सुधार करना और सरकारी गतिविधियों और कार्यक्रमों को संचालित करना है। हम पहचानी गई त्रुटियों की प्रकृति को सुनिश्चित करते हैं कि वे एकाकी या पुनरावर्ती प्रकार की हैं। हम न केवल सुधारात्मक कार्रवाई को प्रेरित करना चाहते हैं अपितु यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि दोबारा गलती न दोहराई जाये। हम कार्यप्रद्धति, प्रक्रिया और प्रसंस्करणों को सुधारने के लिए उचित, सूचित और कार्यान्वयन योग्य सिफारिशें करते हैं।
सीएजी किस प्रकार के प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है?
संसद और राज्य विधान मंडलों में प्रस्तुत की गई सीएजी की लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों में राजस्व संग्रहण और सरकार के व्यय को कवर करते हुए अनुपालना और निष्पादन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, विधान द्वारा प्रावधान किए गए कुछ स्वायत्त निकायों की कार्य प्रणाली पर पृथक लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, संघ और राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिवेदन और संसद और विधान मंडलों द्वारा पारित किये गये विनियोजन अधिनियमों के अनुपालन पर प्रतिवेदन शामिल होते हैं। सीएजी राज्य विधान मंडलों में राज्यों के प्रमाणित वार्षिक लेखे भी प्रस्तुत करता है जिन्हें वित्त और विनियोजन लेखे कहा जाता है।
हम कितने प्रकार के लेखापरीक्षा करते हैं?
लेखापरीक्षा के उद्देश्यों के आधार पर हम सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा को निम्नलिखित में वर्गीकृत करते है:
1. अनुपालन लेखापरीक्षा इस बात पर केंद्रित है कि क्या कोई विशेष विषय मापदंड के अनुपालन में है। अनुपालन अंकेक्षण यह निर्धारित करके किया जाता है कि क्या गतिविधियाँ, वित्तीय लेनदेन और सूचनाएं सभी महत्वपूर्ण पहलुओं में लागू प्राधिकार के अनुरुप हैं जिसमें संविधान, अधिनियम, कानून, नियम और विनियम, बजट संकल्प, नीति, संविदा, करार, स्थापित कोड, आपूर्ति आदेश, तय शर्ते या ठोस लोक उपक्रम वित्तीय प्रबंधन और लोक कार्मिकों के आचरण को शासित करने वाले सामान्य सिद्धांत शामिल हैं।
2. वित्तीय साक्ष्य लेखापरीक्षा यह निर्धारित करने पर बल देता है कि किसी इकाई की वित्तीय सूचना लागू वित्तीय रिपोर्टिंग और नियामक ढांचे के अनुसार प्रस्तुत की गई है। यह लेखापरीक्षक को राय व्यक्त करने में सक्षम बनाने के लिए पर्याप्त और उचित लेखापरीक्षा साक्ष्य प्राप्त करने के द्वारा पूरा किया जाता है कि क्या वित्तीय सूचनाएं धोखाधड़ी या त्रुटि के कारण तात्विक अशुद्ध कथन से मुक्त हो।
3. निष्पादन लेखा परीक्षा इस बात पर केंद्रित है कि क्या हस्तक्षेप, कार्यक्रम और संस्थान मितव्ययी, दक्षता और प्रभावशीलता के सिद्धांतों के अनुसार निष्पादन कर रहे हैं और क्या सुधार की गुंजाइश है। निष्पादन की जाँच उचित मानदंड के अनुसार की जाती है और उन मानदंडों या अन्य समस्याओं से विचलन के कारणों का विश्लेषण किया जाता है। निष्पादन लेखापरीक्षा का उद्देश्य प्रमुख लेखापरीक्षा प्रश्नों का उत्तर देना और सुधार के लिए सिफारिशें प्रदान करना है। इन पारंपरिक ऑडिट के अलावा, हमने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रणाली और पर्यावरण के मुद्दों पर सफलतापूर्वक कई लेखापरीक्षा की हैं।
हम किसकी लेखापरीक्षा करते हैं?
सभी संघ और राज्य सरकार के विभागों, सरकारी कंपनियों और निगमों, स्वायत्त निकायों और संघ या राज्यों के स्वामित्व या नियंत्रण वाले प्राधिकरण, संघ से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकायों और प्राधिकरणों जैसे स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं जो विकास कार्यक्रमों के कार्यावयन और सेवाऐं प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण आरंभिक स्तर की एजेंसियाँ हैं।
अपनी भूमिका निभाने के लिए सीएजी की क्या शक्तियां हैं?
उनके विस्तृत लेखापरीक्षा अधिदेश का प्रयोग निर्बाध रूप से करने के क्रम में अधिनियम प्रावधान करता है:
उनके लेखापरीक्षा के अधीन किसी कार्यालय या संगठन के निरीक्षण करने की शक्ति। सभी लेन-देनों की जांच और कार्यकारी से प्रश्न करने की शक्ति।
किसी भी लेखापरीक्षित सत्त्व से कोई भी रिकार्ड, पेपर, दस्तावेज मांगने की शक्ति।
लेखापरीक्षा की सीमा और स्वरूप पर निर्णय लेने की शक्ति।
सीएजी के क्या कर्तव्य हैं?
जैसा संविधान के अनुच्छेद 149 में उल्लेखित है संसद ने 1971 में सीएजी के कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम नामक एक विस्तृत विधान को अधिनियमित किया जो उनके अधिदेश का वर्णन करता है और सरकार (केंद्र और राज्य) के लगभग प्रत्येक व्यय, राजस्व संग्रहण या सहायता/अनुदान प्राप्त करने वाली इकाई उनकी लेखापरीक्षा के अंतर्गत आती हैं। उनका कर्तव्य अग्रलिखित की लेखापरीक्षा करना और उस पर रिपोर्ट तैयार करना है:
संघ और राज्य सरकार की समेकित निधि से संबंधित सभी प्राप्तियां और इससे किये गये व्यय।
आकस्मिक व्यय (आकस्मिक निधि) और केंद्र सहित राज्य स्तर पर लोक लेखा में सरकार द्वारा धारित लोक धन से संबंधित सभी लेन-देन।
किसी भी सरकारी विभाग में रखे गये सभी व्यापारिक, विनिर्माण, लाभ और हानि खाते, तुलन पत्र और अन्य सहायक खाते।
सभी सरकारी कार्यालयों और विभागों के सभी स्टोर और स्टॉक खाते। सभी सरकारी कंपनियों और निगमों के खाते।
सरकारी धन प्राप्त करने वाले सभी स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण के खाते।
राष्ट्रपति/राज्यपाल के अनुरोध या उनकी अपनी पहल पर किसी निकाय या प्राधिकरण के खाते।
अधिनियम, राज्य सरकारों द्वारा संधारित सहायक खातों से राज्य सरकारों के खातों के संकलन का प्रावधान करता है।
सीएजी की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित की गई है?
संविधान निम्नलिखित रुप से सीएजी को लेखापरीक्षा की स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है। भारत के राष्ट्रपति द्वारा सीएजी की नियुक्ति, पद से हटाने हेतु विशेष प्रक्रिया (जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश), भारत की समेकित निधि से वेतन और प्रभारित व्यय (दत्तमत्त नहीं), उनकी कार्य अवधि समाप्त होने के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में कार्य करने की अनुमति न होना।
हम कौन है ?
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) और भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएडी), भारतीय संविधान के अंतर्गत कार्य करते हुए भारतीय सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था (साईं) को गठित करते हैं। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखापरीक्षक के रूप में अधिदेशित किया है। इस प्रकार हम जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए एक यंत्र हैं। सविधान का अनुच्छेद 149-151 सीएजी की विशेष भूमिका निर्धारित करता है।
सीएजी की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चियत की गई है?
संविधान निम्नलिखित रूप से सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा की स्वतंत्र और निष्परक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है:
भारत के राष्ट्र पति द्वारा सीएजी की नियुक्ति
पदच्यूति हेतु विशेष प्रक्रिया (जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश)
भारत की समेकित निधि से वेतन और प्रभारित व्यय (दत्त मत)
उनकी कार्य अवधि समाप्त होने के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में कार्य करने की अनुमति न होना।
हम कौन है
प्रजातन्त्र में जिनके पास शक्तियां और जिम्मेदारियां होती है वे अपने कार्यों के प्रति जवाहदेह होने चाहिए। इस उद्देश्य हेतु संविधान ने कई संस्थागत तंत्र जैसे न्यायापालिका, सर्तकता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था (साई) को अधिदेशित किया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक और भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएडी) इसके अंतर्गत कार्य करते हुए भारतीय सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था को गठित करते हैं। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखापरीक्षक के रूप में अधिदेशित किया है। इस प्रकार हम जिम्मेदारी सुनिश्चिात करने के लिए एक यंत्र हैं। सविधान का अनुच्छेद 149-151 सीएजी की विशेष भूमिका निर्धारित करती है।
लेखापरीक्षकों की लेखापरीक्षा कौन करता है?
कभी-कभी एक प्रश्न पूछा जाता है कि "ऑडिटर्स की लेखापरीक्षा कौन करता है?" भारत के सीएजी कार्यालय में एक आंतरिक निरीक्षण विंग है जो समय-समय पर देश में स्थित लेखा परीक्षा और लेखा कार्यालयों का निरीक्षण करता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके पास पर्याप्त प्रशासनिक और तकनीकी नियंत्रण हैं और वे उनका प्रभावी ढंग से अनुपालन करते हैं ।इसके अतिरिक्त, सीएजी में 'पीयर रिव्यू ’ की एक प्रणाली है अर्थात् एक इकाई द्वारा एक समान स्टैंड की एक अन्य इकाई द्वारा किए गए कार्य की समीक्षा। लेखापरीक्षा कार्यालयों की पीयर रिव्यू, अन्य समान लेखा परीक्षा कार्यालयों के प्रमुखों द्वारा की जाती है। यह सुनिश्चित करता है कि लेखापरीक्षा कार्य को प्रभावी ढंग से और योजनाबद्ध तरीके से निष्पादित किया जाता है और लेखापरीक्षा प्रोडक्ट, संगठन के बैंचमार्क और हितधारकों की जरूरतों को पूरा करते है।
भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा विभाग कैसे संगठित किया जाता है ?
सीएजी का कार्यालय, नई दिल्ली लेखापरीक्षा, लेखा और आईएएंडएडी के हकदारी कार्यों से संबंधित सभी गतिविधियों को निर्देशित, मॉनीटर और नियंत्रित करता है। क्षेत्रीय स्तर पर अनेक कार्यालय है जैसेः
• प्रत्येक राज्य में महालेखाकार (लेखापरीक्षा) का कार्यालय लेखापरीक्षा के लिए उत्तरदायी है,
• राज्य लेखे के संकलन के लिए एवं हकदारी कार्यों का पालन करने के लिए महालेखाकार (लेखा एवं हक.) का कार्यालय,
• सभी सिविल मंत्रालयों और विभागों रक्षा, रेलवे, डाक और दूरसंचार सहित संघीय गतिविधियों की लेखापरीक्षा हेतु प्रधान निदेशक, लेखापरीक्षा उत्तरदायी है,
• केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की लेखापरीक्षा का कार्य सदस्य, लेखापरीक्षा बोर्ड के कार्यालय को सौंपा गया है।
• विदेशों में भारतीय मिशन की लेखापरीक्षा के लिए विदेश स्थित कार्यालय।
सीएजी अपनी भूमिका कैसे निभाता है ?
सीएजी का अपनी संविधानात्मक भूमिका को निभाने के लिए भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएंडएडी) द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। आईएएंडएडी के शीर्ष और मध्यम प्रबंधकीय स्तर पर, भारतीय लेखा और लेखापरीक्षा सेवा (आईएएंडएएस) के अधिकारी हैं। उन्हें या तो यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा द्वारा सीधे नियुक्त किया जाता है या ग्रुप बी (पर्यवेक्षण स्टाफ) से पदोन्नत कर शामिल किया जाता है। कुछ अधीनस्थ संवर्ग भी है जिनमें राजपत्रित पर्यवेक्षण संवर्ग (ग्रुप ए) में वरिष्ठ लेखापरीक्षा अधिकारी और सहायक लेखापरीक्षा अधिकारी (ग्रुप बी) तथा सहायक स्टाफ संवर्ग (ग्रुप सी) शामिल हैं।
पीएसी की बैठकों में सीएजी की क्या भूमिका है ?
सीएजी और उसके अधिकारी राज्य विधानसभाओं की पीएसी के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी रिपोर्ट आम तौर पर समितियों के काम करने का आधार बनती है। सीएजी या उनके अधिकारी गहन परीक्षण के लिए ऑडिट पैराग्राफ के चयन में समिति के सदस्यों की सहायता करते हैं। वह उन विभागीय प्रत्युत्तर की जांच करते है जो विभाग समितियों को सौंपते हैं। वे समितियों को विभाग द्वारा किए गए प्रस्तुतिकरण की सत्यता की जांच करने में मदद करते हैं और उनकी मसौदा रिपोर्ट में तथ्यों और आंकड़ों की शुद्धता की जांच करने में भी उनकी मदद करते हैं।
लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों का क्या होता है?
संघ के मामलें में सीएजी के प्रतिवेदन राष्ट्रपति को और राज्य मामलों में राज्यपाल को प्रस्तुत किये जाते हैं जो उन्हें सदन के समक्ष प्रस्तुत करता है। एक बार सदन में प्रस्तुत किये जाने के बाद, प्रतिवेदन लोक लेखा समिति (पीएसी)/लोक उपक्रम समिति (कोपू) की केंद्रीय और राज्य स्थाई समितियों को स्थाई रूप से संदर्भित हो जाते हैं। ये विशेषज्ञ समितियां वार्षिक लेखे और उनपर लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की समयबद्ध और गहन संवीक्षा उपलब्ध करवाने के लिए गठित की गई हैं। समितियां लोक हित के सर्वाधिक महत्वपूर्ण निष्कर्षों और सिफारिशों को हमारे प्रतिवेदनों से चुनते है और उन पर अपनी सुनवाई रखते हैं। हम इस कार्य में इन समितियों को तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं। समितियों की सुनवाई के समय, कार्रवाई/गैर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार कार्यकारी को बुलाया जा सकता है। उनकी जांच के आधार पर, समिति अपने प्रतिवेदन तैयार करती है और विधान मंडल को प्रस्तुत करती है जो समिति की सुनवाईयों, कार्यकारी द्वारा की गई कार्रवाई और प्रशासनिक प्रथाओं और कार्यप्रणालियों को सुधारने के लिए की गई सिफारिशों को शामिल कर सारबद्ध करती है।
ड्राफ्ट पैराग्राफ क्या है ?
लेखापरीक्षा निरीक्षण से उत्पन्न होने वाले मुख्य लेखापरीक्षा निष्कर्षों को सीएजी की लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, जिसे विधान सभा में प्रस्तुत करना होता है में शामिल करने के लिए ड्राफ्ट पैराग्राफ के रूप में संसाधित किया जाता है। लेखापरीक्षा कार्यालय, प्रस्तावित ड्राफ्ट पैराग्राफ को राज्य सरकार के संबंधित विभागाध्यक्षों को उनके नाम से भेजते है जिसका छह सप्ताह की अवधि के भीतर सरकार द्वारा उत्तर देना होता हैं। ड्राफ्ट पैराग्राफ को अंतिम रूप देने से पहले सरकार के उत्तरों पर विचार किया जाता है। उन मामलों में जहां उत्तर संतोषजनक हैं, ड्राफ्ट पैराग्राफ को लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में शामिल नहीं किया जाता हैं।
क्या लेखापरीक्षा कार्यालयों द्वारा निरीक्षण प्रतिवेदन में शामिल आक्षेपों का अनुसरण किया गया है? यदि हां, तो कैसे?
निरीक्षण प्रतिवेदन के प्रत्युत्तर में लेखापरीक्षित इकाइयों से प्राप्त उत्तरों की लेखापरीक्षा कार्यालयों में जांच की जाती है और संतोषजनक पाए जाने पर आक्षेपों का निपटान किया जाता है। लेखापरीक्षा कार्यालयों द्वारा बकाया निरीक्षण प्रतिवेदनों/आक्षेपों के संबंध में समय-समय पर अनुस्मारक जारी किए जाते हैं। लेखापरीक्षा समिति की बैठकों के दौरान लेखापरीक्षा आक्षेपों पर लेखापरीक्षा कर्मियों और ऑडिट के प्रतिनिधियों के बीच चर्चा की जाती है और उनका निपटान किया जाता है। आगामी लेखापरीक्षा के समय भी, ऐसे आक्षेप जिनका निपटान नहीं हुआ, की लेखापरीक्षा दल दवारा समीक्षा की जाती है। संक्षेप में, निरीक्षण प्रतिवेदन में शामिल लेखापरीक्षा आक्षेपों का उनके अंतिम निपटान होने तक अनुसरण किया जाता है।
निरीक्षण प्रतिवेदन क्या है?
लेखापरीक्षा निरीक्षण के परिणामों से एक प्रतिवेदन, जिसे निरीक्षण प्रतिवेदन के रूप में जाना जाता है, संबंधित लेखापरीक्षित इकाई के प्रभारी अधिकारी को एक निर्धारित समय अवधि के भीतर लेखापरीक्षा निष्कर्षों पर लिखित उत्तर प्रस्तुत करने के अनुरोध के साथ औपचारिक रूप से अवगत करवाया जाता है।
लेखापरीक्षा योजना क्या है? यह कैसे तैयार की जाती है?
लेखापरीक्षा योजना एक वार्षिक लेखापरीक्षा कार्यक्रम है, जो कि वर्ष के दौरान लेखापरीक्षा संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर आगामी वित्तीय वर्ष के दौरान लेखापरीक्षित की जानी वाली इकाइयों और योजनाओं/कार्यक्रमों को निर्दिष्ट करता है। प्रतिवर्ष, प्रत्येक लेखापरीक्षा कार्यालय विस्तृत जोखिम विश्लेषण के आधार पर एक औपचारिक लेखापरीक्षा योजना तैयार करता है जिसमें व्यय की मात्रा, आंतरिक नियंत्रण का स्तर, पिछले लेखापरीक्षा आक्षेप, मीडिया रिपोर्ट, विभागों द्वारा की गई योजनाएँ और अन्य मापदंड शामिल होते हैं। योजना में लेखापरीक्षा और लेखापरीक्षा संसाधनों के आवंटन के लिए प्रस्तावित लेखापरीक्षित इकाइयों की पहचान की जाती है। लेखा परीक्षा योजना के उद्देश्य हैं:
• हितधारकों को उचित आश्वासन प्रदान करना कि लेखापरीक्षा प्राथमिकताओं को तय करते समय सभी उचित जोखिमों को शामिल किया गया है;
• वर्तमान मुद्दों और दबाव क्षेत्रों पर विशेष जोर देने के साथ अनिवार्य और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों/उपक्रमों (विभागों, कार्यक्रमों/योजनाओं/परियोजनाओं आदि) को शामिल करने के लिए लेखापरीक्षा कार्य को प्राथमिकता देना;
• यदि आवश्यक हो, विशेषज्ञों की सेवाओं का उपयोग करके पर्याप्त पर्यवेक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करके लेखापरीक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना;
• लेखापरीक्षा माहौल में बदलाव के कारण लेखापरीक्षा के लिए नई और उभरती चुनौतियों पर विशेष ध्यान देना।
हमारे प्रतिवेदन का केन्द्र बिन्दु क्या है?
लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में अंतिम, पूर्णत: संपुष्ट लेखापरीक्षा निष्कर्ष होते हैं। ये विभाग द्वारा स्वीकृत की गई है और/या तथ्यातत्मक रूप से साबित की गई और विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। हमारी लेखापरीक्षा का उद्देश्य प्रबंधन में सुधार करना और सरकारी गतिविधियों और कार्यक्रमों को संचालित करना है। हम पहचानी गई त्रुटियों की प्रकृति को सुनिश्चित करते हैं कि वे एकाकी या पुनरावर्ती प्रकार की हैं। हम न केवल सुधारात्मक कार्रवाई को प्रेरित करना चाहते हैं अपितु यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि दोबारा गलती न दोहराई जाये। हम कार्यप्रद्धति, प्रक्रिया और प्रसंस्करणों को सुधारने के लिए उचित, सूचित और कार्यान्वयन योग्य सिफारिशें करते हैं।
सीएजी किस प्रकार के प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है?
संसद और राज्य विधान मंडलों में प्रस्तुत की गई सीएजी की लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों में राजस्व संग्रहण और सरकार के व्यय को कवर करते हुए अनुपालना और निष्पादन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, विधान द्वारा प्रावधान किए गए कुछ स्वायत्त निकायों की कार्य प्रणाली पर पृथक लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, संघ और राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिवेदन और संसद और विधान मंडलों द्वारा पारित किये गये विनियोजन अधिनियमों के अनुपालन पर प्रतिवेदन शामिल होते हैं। सीएजी राज्य विधान मंडलों में राज्यों के प्रमाणित वार्षिक लेखे भी प्रस्तुत करता है जिन्हें वित्त और विनियोजन लेखे कहा जाता है।
हम कितने प्रकार की लेखापरीक्षा करते हैं?
लेखापरीक्षा के उद्देश्यों के आधार पर हम सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा को निम्नलिखित में वर्गीकृत करते है:
1.अनुपालन लेखापरीक्षा इस बात पर केंद्रित है कि क्या कोई विशेष विषय मापदंड के अनुपालन में है। अनुपालन अंकेक्षण यह निर्धारित करके किया जाता है कि क्या गतिविधियाँ, वित्तीय लेनदेन और सूचनाएं सभी महत्वपूर्ण पहलुओं में लागू प्राधिकार के अनुरुप हैं जिसमें संविधान, अधिनियम, कानून, नियम और विनियम, बजट संकल्प, नीति, संविदा, करार, स्थापित कोड, आपूर्ति आदेश, तय शर्ते या ठोस लोक उपक्रम वित्तीय प्रबंधन और लोक कार्मिकों के आचरण को शासित करने वाले सामान्य सिद्धांत शामिल हैं।
2. वित्तीय साक्ष्य लेखापरीक्षा यह निर्धारित करने पर बल देता है कि किसी इकाई की वित्तीय सूचना लागू वित्तीय रिपोर्टिंग और नियामक ढांचे के अनुसार प्रस्तुत की गई है। यह लेखापरीक्षक को राय व्यक्त करने में सक्षम बनाने के लिए पर्याप्त और उचित लेखापरीक्षा साक्ष्य प्राप्त करने के द्वारा पूरा किया जाता है कि क्या वित्तीय सूचनाएं धोखाधड़ी या त्रुटि के कारण तात्विक अशुद्ध कथन से मुक्त हो।
3. निष्पादन लेखा परीक्षा इस बात पर केंद्रित है कि क्या हस्तक्षेप, कार्यक्रम और संस्थान मितव्ययी, दक्षता और प्रभावशीलता के सिद्धांतों के अनुसार निष्पादन कर रहे हैं और क्या सुधार की गुंजाइश है। निष्पादन की जाँच उचित मानदंड के अनुसार की जाती है और उन मानदंडों या अन्य समस्याओं से विचलन के कारणों का विश्लेषण किया जाता है। निष्पादन लेखापरीक्षा का उद्देश्य प्रमुख लेखापरीक्षा प्रश्नों का उत्तर देना और सुधार के लिए सिफारिशें प्रदान करना है। इन पारंपरिक ऑडिट के अलावा, हमने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रणाली और पर्यावरण के मुद्दों पर सफलतापूर्वक कई लेखापरीक्षा की हैं।
हम किसकी लेखापरीक्षा करते हैं?
सभी संघ और राज्य सरकार के विभागों, सरकारी कंपनियों और निगमों, स्वायत्त निकायों और संघ या राज्यों के स्वामित्व या नियंत्रण वाले प्राधिकरण, संघ से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकायों और प्राधिकरणों जैसे स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं जो विकास कार्यक्रमों के कार्यावयन और सेवाऐं प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण आरंभिक स्तर की एजेंसियाँ हैं।
अपनी भूमिका निभाने के लिए सीएजी की क्या शक्तियां हैं?
उनके विस्तृत लेखापरीक्षा अधिदेश का प्रयोग निर्बाध रूप से करने के क्रम में अधिनियम प्रावधान करता है:
• उनके लेखापरीक्षा के अधीन किसी कार्यालय या संगठन के निरीक्षण करने की शक्ति। सभी लेन-देनों की जांच और कार्यकारी से प्रश्न करने की शक्ति।
• किसी भी लेखापरीक्षित सत्त्व से कोई भी रिकार्ड, पेपर, दस्तावेज मांगने की शक्ति।
• लेखापरीक्षा की सीमा और स्वरूप पर निर्णय लेने की शक्ति।
सीएजी के क्या कर्तव्य हैं?
जैसा संविधान के अनुच्छेद 149 में उल्लेखित है संसद ने 1971 में सीएजी के कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम नामक एक विस्तृत विधान को अधिनियमित किया जो उनके अधिदेश का वर्णन करता है और सरकार (केंद्र और राज्य) के लगभग प्रत्येक व्यय, राजस्व संग्रहण या सहायता/अनुदान प्राप्त करने वाली इकाई उनकी लेखापरीक्षा के अंतर्गत आती हैं। उनका कर्तव्य अग्रलिखित की लेखापरीक्षा करना और उस पर रिपोर्ट तैयार करना है:
• संघ और राज्य सरकार की समेकित निधि से संबंधित सभी प्राप्तियां और इससे किये गये व्यय।
• आकस्मिक व्यय (आकस्मिक निधि) और केंद्र सहित राज्य स्तर पर लोक लेखा में सरकार द्वारा धारित लोक धन से संबंधित सभी लेन-देन।
• किसी भी सरकारी विभाग में रखे गये सभी व्यापारिक, विनिर्माण, लाभ और हानि खाते, तुलन पत्र और अन्य सहायक खाते।
• सभी सरकारी कार्यालयों और विभागों के सभी स्टोर और स्टॉक खाते। सभी सरकारी कंपनियों और निगमों के खाते।
• सरकारी धन प्राप्त करने वाले सभी स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण के खाते।
• राष्ट्रपति/राज्यपाल के अनुरोध या उनकी अपनी पहल पर किसी निकाय या प्राधिकरण के खाते।
• अधिनियम, राज्य सरकारों द्वारा संधारित सहायक खातों से राज्य सरकारों के खातों के संकलन का प्रावधान करता है।
सीएजी की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित की गई है?
संविधान निन्नलिखित रुप से सीएजी को लेखापरीक्षा की स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है। भारत के राष्ट्रपति द्वारा सीएजी की नियुक्ति, पद से हटाने हेतु विशेष प्रक्रिया (जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश), भारत की समेकित निधि से वेतन और प्रभारित व्यय (दत्तमत्त नहीं), उनकी कार्य अवधि समाप्त होने के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में कार्य करने की अनुमति न होना।
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क्या विधवा / तलाकशुदा / अविवाहित पुत्रियोंको बाद में किसी तिथि पर पारिवारिक सदस्यों के रूप में सम्मिलित करना संभव है (यदि उन्हें सरकारी सेवक की सेवानिवृत्ति के समय पर शामिल नहीं किया गया हो)?
हाँ
आईएएंडएडी कैसे संगठित किया गया है?
सीएजी का कार्यालय, नई दिल्ली लेखापरीक्षा, लेखा और आईएएंडएडी के हकदारी कार्यों से संबंधित सभी गतिविधियों को निदेशित, मॉनीटर और नियंत्रित करता है। क्षेत्रीय स्तर पर 133 कार्यालय है:
प्रत्येक राज्य में महालेखाकार/लेखापरीक्षा का कार्यालय लेखापरीक्षा के लिए उत्तरदायी है,
राज्य लेखे के संकलन के लिए हकदारी का पालन करने के लिए महालेखाकार (ले. व ह.) का कार्यलय,
सभी सिविल मंत्रालयों और विभागों रक्षा, रेलवे, डाक और दूरसंचार सहित संघ गतिविधियों की लेखापरीक्षा हेतु प्रधान निदेशक लेखापरीक्षा उत्तरदायी है,
केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की लेखापरीक्षा का कार्य सदस्य लेखापरीक्षा बोर्ड के कार्यालय को सौंपा गया है।
विदेशों में भारतीय मिशन की लेखापरीक्षा के लिए विदेश स्थित कार्यालय।
सीएजी अपनी भूमिका कैसे निभाता है?
सीएजी का अपनी संविधानात्मक भूमिका को निभाने के लिए भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएंडएडी) द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। आईएएंडएडी के शीर्ष और मध्यर प्रबंधकीय स्तर पर लगभग 600 भारतीय लेखा और लेखापरीक्षा सेवा (आईएएंडएएस) अधिकारी हैं। उन्हें या तो यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा द्वारा सीधे नियुक्त किया जाता है या ग्रुप बी (पर्यवेक्षण स्टाफ) से पदोन्नत कर शामिल किया जाता है। कुछ अधीनस्थ संवर्ग भी है जिनकी संख्याै लगभग 47000 है। इसमें राजपत्रित पर्यवेक्षण संवर्ग (ग्रुप बी) में वरिष्ठव लेखापरीक्षा/लेखाअधिकारी, लेखापरीक्षा अधिकारी और सहायक लेखापरीक्षा अधिकारी तथा सहायक स्टाफ संवर्ग (ग्रुप सी) शामिल हैं।
लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों का क्या होता हैं?
संघ के मामले में सीएजी के प्रतिवेदन राष्ट्रशपति को और राज्य मामले में राज्यपाल को प्रस्तुत किये जाते हैं जो उन्हें सदन के समक्ष प्रस्तुत करता है। एक बार सदन में प्रस्तुत किये जाने के बाद, प्रतिवेदन लोक लेखा समिति (पीएसी)/लोक उपक्रम समिति (कोपू) की केंद्रीय और राज्य स्थाई समितियों को स्थाई रूप से संदर्भित हो जाते हैं। ये विशिष्टम समितियां वार्षिक लेखे और उनपर लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की समयबद्ध और गहन संवीक्षा उपलब्ध करवाने के लिए गठित की गई हैं। समितियां लोक हित के सर्वाधिक महत्वपूर्ण निष्कीर्षों और सिफारिशों को हमारे प्रतिवेदनों से चुनते है और उन पर अपनी सुनवाईयों रखते हैं। हम इस कार्य में इन समितियों को अपना तकनीकी सहायता करते हैं। समितियों की सुनवाईयों पर, कार्रवाई/गैर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार कार्यकारी को बुलाया जा सकता है। उनकी जांच के आधार पर, समिति अपने प्रतिवेदन तैयार करते है और विधान मंडल को प्रस्तुत करते है जो समिति की सुनवाईयों, कार्यकारी द्वारा की गई कार्रवाई और प्रशासनिक प्रथाओं और कार्यप्रणालियों को सुधारने के लिए सिफारिशों को शामिल कर सारबद्ध करती है।
हमारे प्रतिवेदन का केंद्र बिंदु क्या है?
लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में अंतिम, पूर्णत: परिपुष्टे लेखापरीक्षा निष्क र्ष होते हैं। ये विभाग द्वारा स्वीकृत की गई है और/या तथ्यातत्मक रूप से साबित की गई और विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। हमारी लेखापरीक्षा का उद्देश्य प्रबंधन में और सरकारी गतिविधियों और कार्यक्रमों में सुधार करना है। हम पहचानी गई त्रुटियों की प्रकृति को सुनिश्चिनत करते हैं कि वे एकाकी या पुनरावर्ती प्रकार की है। हम न केवल सुधारात्मक कार्रवाई को प्रेरित करना चाहते हैं अपितु यह भी सुनिश्चितत करना चाहते हैं कि दोबारा गलती न दोहराई जाये। हम कार्यप्रद्धति, प्रक्रियाएं और प्रसंस्करणों को सुधारने के लिए उचित, सूचित और कार्यान्वयन योग्य सिफारिशें करते हैं।
किस प्रकार के प्रतिवेदन सीएजी प्रस्तुत करता है?
संसद और राज्य विधान मंडलों में प्रस्तुत की गई सीएजी की लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों में राजस्व संग्रहण और सरकार के व्यय को कवर करते हुए अनुपालना और निष्पाईदन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, विधान द्वारा प्रावधान किए गए कुछ स्वायत्त निकायों की कार्य प्रणाली पर पृथक लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, संघ और राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिवेदन और संसद और विधान मंडलों द्वारा पारित किये गये विनियोजन अधिनियमों के अनुपालन पर प्रतिवेदन शामिल होते हैं। सीएजी राज्य विधान मंडलों में राज्यों के प्रमाणित वार्षिक लेखे भी प्रस्तुत करता है जिन्हें वित्त और विनियोजन लेखे कहा जाता है।
हम कितने प्रकार के लेखापरीक्ष करते हैं?
लेखापरीक्षा के उद्देश्योंक के आधार पर हम सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा को निम्नलिखित में वर्गीकृत करते है:
अनुपालन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
वित्तीय सत्यापन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
निष्पायदन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
इन परम्परागत लेखापरीक्षा के अतिरिक्त, हम सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रणाली और पर्यावरण मामलों पर भी कई सफल लेखापरीक्षा कर चुके हैं।
हम किसकी लेखापरीक्षा करते हैं?
सीएजी की लेखापरीक्षा के अंतर्गत आने वाले संगठन हैं:-
भारतीय रेल, रक्षा और डाक और दूरसंचार सहित सभी संघ और राज्य सरकार विभाग।
संघ और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित लगभग 1500 सार्वजनिक वाणिज्यक उद्यम जैसे सरकारी कंपनियां और निगम।
संघ और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित और स्वामित्व वाले लगभग 400 गैर वाणिज्यिक स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण।
संघ से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकायों और प्राधिकरणों जैसे स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं जो विकास कार्यक्रमों के कार्यावयन और सेवाऐं प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण आरंभिक स्तर की एजेंसिया हैं।
अपनी भूमिका निभाने के लिए सीएजी की क्या शक्तियां है?
उनके विस्तृत लेखापरीक्षा अधिदेश का प्रयोग निर्बाध रूप से करने के क्रम में अधिनियम का प्रावधान करता है:
उनके लेखापरीक्षा के अधीन किसी कार्यालय या संगठन के निरीक्षण करने की शक्ति।
सभी लेन-देनों की जांच और कार्यकारी से प्रश्नष करने की शक्ति।
किसी भी लेखापरीक्षित सत्त्व से कोई भी रिकार्ड, पेपर, दस्तावेज मांगने की शक्ति।
लेखापरीक्षा की सीमा और स्व रूप पर निर्णय लेने की शक्ति।
सीएजी के क्या कर्त्तव्य है?
जैसा संविधान के अनुच्छेद 149 में उल्लेखित है संसद ने 1971 में सीएजी के कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम नामक एक विस्तृत विधान को अधिनियमित किया जो उनके अधिदेश का वर्णन करता है और सरकार (केंद्र और राज्य) के लगभग प्रत्येक व्यय राजस्व संग्रहण या सहायता/अनुदान प्राप्त करने वाली इकाई उनकी लेखापरीक्षा के अंतर्गत आती हैं। उनका कर्तव्य अग्रलिखित की लेखापरीक्षा करना और उस पर रिपोर्ट तैयार करना है:
आई ए & ए डी के अन्य क्षेत्रीय क्षमता निर्माण एवं ज्ञान संस्थान कहाँ स्थित हैं ?
अन्य क्षेक्षनि एवं ज्ञासं इलाहाबाद, जम्मू, हैदराबाद, जयपुर, नागपुर, कोलकाता, चेन्नई, रांची और शिलांग में स्थित हैं ।
क्या क्षेक्षनि एवं ज्ञासं, मुंबई में, आरएसी द्वारा अनुमोदित नहीं होनेवाले पाठ्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ?
मुख्यालय द्वारा वांछित अतिरिक्त पाठ्यक्रम किए जा सकते हैं । मुख्यालय से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद, उपयोगकर्ता कार्यालयों से अनुरोध के आधार पर अतिरिक्त प्रशिक्षण भी किया जा सकता है । इन सभी अतिरिक्त पाठ्यक्रमों के बारे में, आगामी बैठक में आरएसी को अवगत कराया जाता है ।
आरएसी क्या है ?
यह "क्षेत्रीय सलाहकार समिति" है जिसमें सभी उपयोगकर्ता कार्यालयों के साथ-साथ हमारे मुख्यालय प्रशिक्षण विंग के सदस्य प्रतिनिधि शामिल हैं । यह समिति साल में दो बार मिलती है, आम तौर पर जनवरी / फरवरी अगस्त / सितंबर के महीनों में । आरएसी उपयोगकर्ता कार्यालयों द्वारा निर्दिष्ट प्रशिक्षण की आवश्यकता विश्लेषण के आधार पर क्षेक्षनि एवं ज्ञासं के लिए "वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर" को अंतिम रूप देता है । वे बैठकों के दौरान प्रशिक्षण संस्थान के कामकाज की समीक्षा भी करते हैं ।
आई ए & ए डी में कार्यरत किसी को क्षेक्षनि एवं ज्ञासं, मुंबई में प्रशिक्षण के लिए कैसे नामित किया जाता है ?
उपयोगकर्ता कार्यालय द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कैलेंडर में पाठ्यक्रमों के लिए उनके प्रशिक्षण की आवश्यकता विश्लेषण के आधार पर नामांकन किया जाता है, जिसे क्षेत्रीय सलाहकार समिति (आरएसी) और मुख्यालय प्रशिक्षण विंग द्वारा हर साल अनुमोदित किया जाता है । नामांकन अब SAI प्रशिक्षण मॉड्यूल के माध्यम से ऑनलाइन किया जा रहा है ।
क्षेक्षनि एवं ज्ञासं, मुंबई में कौन से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ?
क्षेक्षनि एवं ज्ञासं मुंबई जिन विषयों के लिए ज्ञान केंद्र हैं, उन विषयों के अलावा सामान्य और आईएस दोनों संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण आयोजित करता है । सामान्य विषयों में लेखापरीक्षा और लेखापरीक्षा से संबंधित विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है जैसे लेखापरीक्षा साक्ष्य (Evidence), लेखापरीक्षा रिपोर्टिंग, अनुपालन लेखापरीक्षा , निष्पादन लेखापरीक्षा , प्रमाणन लेखापरीक्षा , लेखापरीक्षा और धोखाधड़ी और धोखाधड़ी का पता लगाने की तकनीक, वित्तीय नियम और वित्तीय प्रबंधन, जीएसटी, आदि । ज्ञान केंद्र के विषयों में निगम से संबंधित शासन प्रणाली (कॉरपोरेट गवर्नेंस), निगम वित्त (कॉर्पोरेट फाइनेंस), स्वायत्त निकाय (ऑटोनॉमस बॉडीज) के लेखापरीक्षा और वाणिज्यिक (कमर्शियल) लेखापरीक्षा शामिल हैं । आईएस पाठ्यक्रम आईटी लेखापरीक्षा पर हैं । आईटी वातावरण में लेखापरीक्षा , पावर एक्सिस (Power Pivot) के साथ एमएस एक्सेल, डेटा एनालिटिक्स, एमएस एक्सेस, विजुअल बेसिक्स के साथ एडवांस्ड एमएस एक्सेस, केसवेयर आईडिया, क्लीकव्यू, टेबलू, ओरेकल आदि ।
क्या आई ए & ए डी में काम नहीं कर रहे कोई अधिकारी (अधिकारी) / अधिकारी को क्षेक्षनि एवं ज्ञासं मुंबई में प्रशिक्षण दिया जा सकता है ?
मुख्यालय के अनुमोदन के साथ प्राप्त अनुरोधों के आधार पर गैर-आईए और एडी कर्मियों के लिए कुछ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, अर्थात्, स्थानीय निधि लेखा परीक्षकों, केंद्रीय सचिवालय के अधिकारियों आदि के लिए प्रशिक्षण, जिसके लिए मानदंडों के अनुसार शुल्क लिया जा सकता है । मुख्यालय द्वारा अनुमोदित अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं ।
क्या उपयोगकर्ता कार्यालयों में काम नहीं करने वाला आई ए & ए डी का कोई अधिकारी / कर्मचारी क्षेक्षनि एवं ज्ञासं मुंबई में प्रशिक्षित किया जा सकता है ?
हमारे प्रशिक्षण क्षेत्राधिकार के तहत आई ए & ए डी उपयोगकर्ता कार्यालयों से अधिकारियों और अधिकारियों के लिए आमतौर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं । किन्तु, ज्ञान केंद्र प्रशिक्षण कार्यक्रमों और मुख्यालय निर्देशित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए, पूरे भारत में आई ए & ए डी कार्यालयों के प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जाता है ।
क्षेत्रीय क्षमता निर्माण एवं ज्ञान संस्थान, मुंबई में किसे प्रशिक्षित किया जाता है?
क्षेत्रीय क्षमता निर्माण एवं ज्ञान संस्थान, मुंबई में मुंबई, पुणे, गुजरात और गोवा में स्थित सभी भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग (आई ए & ए डी ) कार्यालयों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करता है । इनमें हमारे 20 उपयोगकर्ता कार्यालय शामिल हैं ।
क्षेत्रीय क्षमता निर्माण एवं ज्ञान संस्थान, मुंबई कब अस्तित्व में आया ?
क्षेत्रीय क्षमता निर्माण एवं ज्ञान संस्थान, मुंबई, फरवरी 1980 में स्थापित किया गया था और पिछले 40 वर्षों से सुचारू रूप से कार्य कर रहा है ।
सीएजी की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चियत की गई है?
संविधान निम्नलिखित रूप से सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा की स्वतंत्र और निष्परक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है:
भारत के राष्ट्र पति द्वारा सीएजी की नियुक्ति
पदच्यूति हेतु विशेष प्रक्रिया (जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश)
भारत की समेकित निधि से वेतन और प्रभारित व्यय (दत्त मत)
उनकी कार्य अवधि समाप्त होने के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में कार्य करने की अनुमति न होना।
हम कौन है?
प्रजातन्त्र में जिनके पास शक्तियां और जिम्मेदारियां होती है वे अपने कार्यों के प्रति जवाहदेह होने चाहिए। इस उद्देश्य हेतु संविधान ने कई संस्थागत तंत्र जैसे न्यायापालिका, सर्तकता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था (साई) को अधिदेशित किया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक और भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएडी) इसके अंतर्गत कार्य करते हुए भारतीय सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था को गठित करते हैं। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखापरीक्षक के रूप में अधिदेशित किया है। इस प्रकार हम जिम्मेदारी सुनिश्चिात करने के लिए एक यंत्र हैं। सविधान का अनुच्छेद 149-151 सीएजी की विशेष भूमिका निर्धारित करती है।
हम कौन है ?
भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) और भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएडी), भारतीय संविधान के अंतर्गत कार्य करते हुए भारतीय सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था (साईं) को गठित करते हैं। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखापरीक्षक के रूप में अधिदेशित किया है। इस प्रकार हम जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए एक यंत्र हैं। सविधान का अनुच्छेद 149-151 सीएजी की विशेष भूमिका निर्धारित करता है।
हम कौन हैं?
क्षेत्रीय क्षमता निर्माण एवं ज्ञान संस्थान (क्षेक्षनि एवं ज्ञासं ), मुंबई भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग (आई ए & ए डी ) के दस क्षेत्रीय क्षमता निर्माण एवं ज्ञान संस्थानों में से एक है ।
आईएएंडएडी कैसे संगठित किया गया है?
सीएजी का कार्यालय, नई दिल्ली लेखापरीक्षा, लेखा और आईएएंडएडी के हकदारी कार्यों से संबंधित सभी गतिविधियों को निदेशित, मॉनीटर और नियंत्रित करता है। क्षेत्रीय स्तर पर 133 कार्यालय है:
1.प्रत्येक राज्य में महालेखाकार/लेखापरीक्षा का कार्यालय लेखापरीक्षा के लिए उत्तरदायी है,
2.राज्य लेखे के संकलन के लिए हकदारी का पालन करने के लिए महालेखाकार (ले. व ह.) का कार्यलय,
3.सभी सिविल मंत्रालयों और विभागों रक्षा, रेलवे, डाक और दूरसंचार सहित संघ गतिविधियों की लेखापरीक्षा हेतु प्रधान निदेशक लेखापरीक्षा उत्तरदायी है,
4.केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की लेखापरीक्षा का कार्य सदस्य लेखापरीक्षा बोर्ड के कार्यालय को सौंपा गया है।
5.विदेशों में भारतीय मिशन की लेखापरीक्षा के लिए विदेश स्थित कार्यालय।
सीएजी अपनी भूमिका कैसे निभाता है?
सीएजी का अपनी संविधानात्मक भूमिका को निभाने के लिए भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएंडएडी) द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। आईएएंडएडी के शीर्ष और मध्यर प्रबंधकीय स्तर पर लगभग 600 भारतीय लेखा और लेखापरीक्षा सेवा (आईएएंडएएस) अधिकारी हैं। उन्हें या तो यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा द्वारा सीधे नियुक्त किया जाता है या ग्रुप बी (पर्यवेक्षण स्टाफ) से पदोन्नत कर शामिल किया जाता है। कुछ अधीनस्थ संवर्ग भी है जिनकी संख्याै लगभग 47000 है। इसमें राजपत्रित पर्यवेक्षण संवर्ग (ग्रुप बी) में वरिष्ठव लेखापरीक्षा/लेखाअधिकारी, लेखापरीक्षा अधिकारी और सहायक लेखापरीक्षा अधिकारी तथा सहायक स्टाफ संवर्ग (ग्रुप सी) शामिल हैं।
लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों का क्या होता हैं?
संघ के मामले में सीएजी के प्रतिवेदन राष्ट्रशपति को और राज्य मामले में राज्यपाल को प्रस्तुत किये जाते हैं जो उन्हें सदन के समक्ष प्रस्तुत करता है। एक बार सदन में प्रस्तुत किये जाने के बाद, प्रतिवेदन लोक लेखा समिति (पीएसी)/लोक उपक्रम समिति (कोपू) की केंद्रीय और राज्य स्थाई समितियों को स्थाई रूप से संदर्भित हो जाते हैं। ये विशिष्टम समितियां वार्षिक लेखे और उनपर लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की समयबद्ध और गहन संवीक्षा उपलब्ध करवाने के लिए गठित की गई हैं। समितियां लोक हित के सर्वाधिक महत्वपूर्ण निष्कीर्षों और सिफारिशों को हमारे प्रतिवेदनों से चुनते है और उन पर अपनी सुनवाईयों रखते हैं। हम इस कार्य में इन समितियों को अपना तकनीकी सहायता करते हैं। समितियों की सुनवाईयों पर, कार्रवाई/गैर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार कार्यकारी को बुलाया जा सकता है। उनकी जांच के आधार पर, समिति अपने प्रतिवेदन तैयार करते है और विधान मंडल को प्रस्तुत करते है जो समिति की सुनवाईयों, कार्यकारी द्वारा की गई कार्रवाई और प्रशासनिक प्रथाओं और कार्यप्रणालियों को सुधारने के लिए सिफारिशों को शामिल कर सारबद्ध करती है।
हमारे प्रतिवेदन का केंद्र बिंदु क्या है?
लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में अंतिम, पूर्णत: परिपुष्टे लेखापरीक्षा निष्क र्ष होते हैं। ये विभाग द्वारा स्वीकृत की गई है और/या तथ्यातत्मक रूप से साबित की गई और विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। हमारी लेखापरीक्षा का उद्देश्य प्रबंधन में और सरकारी गतिविधियों और कार्यक्रमों में सुधार करना है। हम पहचानी गई त्रुटियों की प्रकृति को सुनिश्चिनत करते हैं कि वे एकाकी या पुनरावर्ती प्रकार की है। हम न केवल सुधारात्मक कार्रवाई को प्रेरित करना चाहते हैं अपितु यह भी सुनिश्चितत करना चाहते हैं कि दोबारा गलती न दोहराई जाये। हम कार्यप्रद्धति, प्रक्रियाएं और प्रसंस्करणों को सुधारने के लिए उचित, सूचित और कार्यान्वयन योग्य सिफारिशें करते हैं।
किस प्रकार के प्रतिवेदन सीएजी प्रस्तुत करता है?
संसद और राज्य विधान मंडलों में प्रस्तुत की गई सीएजी की लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों में राजस्व संग्रहण और सरकार के व्यय को कवर करते हुए अनुपालना और निष्पाईदन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, विधान द्वारा प्रावधान किए गए कुछ स्वायत्त निकायों की कार्य प्रणाली पर पृथक लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, संघ और राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिवेदन और संसद और विधान मंडलों द्वारा पारित किये गये विनियोजन अधिनियमों के अनुपालन पर प्रतिवेदन शामिल होते हैं। सीएजी राज्य विधान मंडलों में राज्यों के प्रमाणित वार्षिक लेखे भी प्रस्तुत करता है जिन्हें वित्त और विनियोजन लेखे कहा जाता है।
हम कितने प्रकार के लेखापरीक्ष करते हैं?
1.अनुपालन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
2.वित्तीय सत्यापन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
3.निष्पायदन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
इन परम्परागत लेखापरीक्षा के अतिरिक्त, हम सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रणाली और पर्यावरण मामलों पर भी कई सफल लेखापरीक्षा कर चुके हैं।
हम किसकी लेखापरीक्षा करते हैं?
सीएजी की लेखापरीक्षा के अंतर्गत आने वाले संगठन हैं:-
1.भारतीय रेल, रक्षा और डाक और दूरसंचार सहित सभी संघ और राज्य सरकार विभाग।
2.संघ और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित लगभग 1500 सार्वजनिक वाणिज्यक उद्यम जैसे सरकारी कंपनियां और निगम।
3.संघ और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित और स्वामित्व वाले लगभग 400 गैर वाणिज्यिक स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण।
4.संघ से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकायों और प्राधिकरणों जैसे स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं जो विकास कार्यक्रमों के कार्यावयन और सेवाऐं प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण आरंभिक स्तर की एजेंसिया हैं।
अपनी भूमिका निभाने के लिए सीएजी की क्या शक्तियां है?
उनके विस्तृत लेखापरीक्षा अधिदेश का प्रयोग निर्बाध रूप से करने के क्रम में अधिनियम का प्रावधान करता है:
1.उनके लेखापरीक्षा के अधीन किसी कार्यालय या संगठन के निरीक्षण करने की शक्ति।
2.सभी लेन-देनों की जांच और कार्यकारी से प्रश्नष करने की शक्ति।
3.किसी भी लेखापरीक्षित सत्त्व से कोई भी रिकार्ड, पेपर, दस्तावेज मांगने की शक्ति।
4.लेखापरीक्षा की सीमा और स्व रूप पर निर्णय लेने की शक्ति।
सीएजी के क्या कर्त्तव्य है?
जैसा संविधान के अनुच्छेद 149 में उल्लेखित है संसद ने 1971 में सीएजी के कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम नामक एक विस्तृत विधान को अधिनियमित किया जो उनके अधिदेश का वर्णन करता है और सरकार (केंद्र और राज्य) के लगभग प्रत्येक व्यय राजस्व संग्रहण या सहायता/अनुदान प्राप्त करने वाली इकाई उनकी लेखापरीक्षा के अंतर्गत आती हैं। उनका कर्तव्य अग्रलिखित की लेखापरीक्षा करना और उस पर रिपोर्ट तैयार करना है:
1.संघ और राज्य सरकार के कोष (समेकित निधि) से संबंधित सभी प्राप्तियां. और इस से किये गये व्यय।
2.आकस्मिक व्यय (आकस्मिक निधि) और सरकार द्वारा धारित लोक धन उदाहरणत: केंद्र सहित राज्य स्तर पर डाक बचत, विकास पत्र (लोक लेखा) से संबंधित सभी लेन-देन।
3.किसी भी सरकारी विभाग में रखे गये सभी व्यापार, उत्पादन, लाभ और हानि खाते, तुलन पत्र और अन्य सहायक खाते।
4.सभी सरकारी कार्यालयों और विभागों के सभी स्टोर और स्टॉक खाते।
5.सभी सरकारी कंपनियों और निगमों जैसे ओएनजीसी, सेल आदि के खाते।
6.सरकारी धन प्राप्त करने वाले सभी स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण जैसे नगर, आईआईएमज़, आईआईटीज़, राज्य स्वास्थ्य संस्थाओं के खाते।
7.राष्ट्रापति राज्यपाल के अनुरोध या उनके अपनी पहल पर किसी निकाय या प्राधिकरण के खाते।
अधिनियम राज्य सरकारों द्वारा अनुरक्षित सहायक खातों से राज्य सरकारों के खातों के संकलन का प्रावधान करता है।
सीएजी की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चियत की गई है?
संविधान निम्नलिखित रूप से सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा की स्वतंत्र और निष्परक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है:
1.भारत के राष्ट्र पति द्वारा सीएजी की नियुक्ति
2.पदच्यूति हेतु विशेष प्रक्रिया (जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश)
3.भारत की समेकित निधि से वेतन और प्रभारित व्यय (दत्त मत)
4.उनकी कार्य अवधि समाप्त होने के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में कार्य करने की अनुमति न होना।
आईएएंडएडी कैसे संगठित किया गया है?
सीएजी का कार्यालय, नई दिल्ली लेखापरीक्षा, लेखा और आईएएंडएडी के हकदारी कार्यों से संबंधित सभी गतिविधियों को निदेशित, मॉनीटर और नियंत्रित करता है। क्षेत्रीय स्तर पर 133 कार्यालय है:
प्रत्येक राज्य में महालेखाकार/लेखापरीक्षा का कार्यालय लेखापरीक्षा के लिए उत्तरदायी है,
राज्य लेखे के संकलन के लिए हकदारी का पालन करने के लिए महालेखाकार (ले. व ह.) का कार्यलय,
सभी सिविल मंत्रालयों और विभागों रक्षा, रेलवे, डाक और दूरसंचार सहित संघ गतिविधियों की लेखापरीक्षा हेतु प्रधान निदेशक लेखापरीक्षा उत्तरदायी है,
केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की लेखापरीक्षा का कार्य सदस्य लेखापरीक्षा बोर्ड के कार्यालय को सौंपा गया है।
विदेशों में भारतीय मिशन की लेखापरीक्षा के लिए विदेश स्थित कार्यालय।
सीएजी अपनी भूमिका कैसे निभाता है?
सीएजी का अपनी संविधानात्मक भूमिका को निभाने के लिए भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएंडएडी) द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। आईएएंडएडी के शीर्ष और मध्यर प्रबंधकीय स्तर पर लगभग 600 भारतीय लेखा और लेखापरीक्षा सेवा (आईएएंडएएस) अधिकारी हैं। उन्हें या तो यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा द्वारा सीधे नियुक्त किया जाता है या ग्रुप बी (पर्यवेक्षण स्टाफ) से पदोन्नत कर शामिल किया जाता है। कुछ अधीनस्थ संवर्ग भी है जिनकी संख्याै लगभग 47000 है। इसमें राजपत्रित पर्यवेक्षण संवर्ग (ग्रुप बी) में वरिष्ठव लेखापरीक्षा/लेखाअधिकारी, लेखापरीक्षा अधिकारी और सहायक लेखापरीक्षा अधिकारी तथा सहायक स्टाफ संवर्ग (ग्रुप सी) शामिल हैं।
लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों का क्या होता हैं?
संघ के मामले में सीएजी के प्रतिवेदन राष्ट्रशपति को और राज्य मामले में राज्यपाल को प्रस्तुत किये जाते हैं जो उन्हें सदन के समक्ष प्रस्तुत करता है। एक बार सदन में प्रस्तुत किये जाने के बाद, प्रतिवेदन लोक लेखा समिति (पीएसी)/लोक उपक्रम समिति (कोपू) की केंद्रीय और राज्य स्थाई समितियों को स्थाई रूप से संदर्भित हो जाते हैं। ये विशिष्टम समितियां वार्षिक लेखे और उनपर लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की समयबद्ध और गहन संवीक्षा उपलब्ध करवाने के लिए गठित की गई हैं। समितियां लोक हित के सर्वाधिक महत्वपूर्ण निष्कीर्षों और सिफारिशों को हमारे प्रतिवेदनों से चुनते है और उन पर अपनी सुनवाईयों रखते हैं। हम इस कार्य में इन समितियों को अपना तकनीकी सहायता करते हैं। समितियों की सुनवाईयों पर, कार्रवाई/गैर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार कार्यकारी को बुलाया जा सकता है। उनकी जांच के आधार पर, समिति अपने प्रतिवेदन तैयार करते है और विधान मंडल को प्रस्तुत करते है जो समिति की सुनवाईयों, कार्यकारी द्वारा की गई कार्रवाई और प्रशासनिक प्रथाओं और कार्यप्रणालियों को सुधारने के लिए सिफारिशों को शामिल कर सारबद्ध करती है।
हमारे प्रतिवेदन का केंद्र बिंदु क्या है?
लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में अंतिम, पूर्णत: परिपुष्टे लेखापरीक्षा निष्क र्ष होते हैं। ये विभाग द्वारा स्वीकृत की गई है और/या तथ्यातत्मक रूप से साबित की गई और विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। हमारी लेखापरीक्षा का उद्देश्य प्रबंधन में और सरकारी गतिविधियों और कार्यक्रमों में सुधार करना है। हम पहचानी गई त्रुटियों की प्रकृति को सुनिश्चिनत करते हैं कि वे एकाकी या पुनरावर्ती प्रकार की है। हम न केवल सुधारात्मक कार्रवाई को प्रेरित करना चाहते हैं अपितु यह भी सुनिश्चितत करना चाहते हैं कि दोबारा गलती न दोहराई जाये। हम कार्यप्रद्धति, प्रक्रियाएं और प्रसंस्करणों को सुधारने के लिए उचित, सूचित और कार्यान्वयन योग्य सिफारिशें करते हैं।
किस प्रकार के प्रतिवेदन सीएजी प्रस्तुत करता है?
संसद और राज्य विधान मंडलों में प्रस्तुत की गई सीएजी की लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों में राजस्व संग्रहण और सरकार के व्यय को कवर करते हुए अनुपालना और निष्पाईदन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, विधान द्वारा प्रावधान किए गए कुछ स्वायत्त निकायों की कार्य प्रणाली पर पृथक लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, संघ और राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिवेदन और संसद और विधान मंडलों द्वारा पारित किये गये विनियोजन अधिनियमों के अनुपालन पर प्रतिवेदन शामिल होते हैं। सीएजी राज्य विधान मंडलों में राज्यों के प्रमाणित वार्षिक लेखे भी प्रस्तुत करता है जिन्हें वित्त और विनियोजन लेखे कहा जाता है।
हम कितने प्रकार के लेखापरीक्ष करते हैं?
लेखापरीक्षा के उद्देश्योंक के आधार पर हम सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा को निम्नलिखित में वर्गीकृत करते है:
अनुपालन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
वित्तीय सत्यापन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
निष्पायदन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
इन परम्परागत लेखापरीक्षा के अतिरिक्त, हम सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रणाली और पर्यावरण मामलों पर भी कई सफल लेखापरीक्षा कर चुके हैं।
हम किसकी लेखापरीक्षा करते हैं?
सीएजी की लेखापरीक्षा के अंतर्गत आने वाले संगठन हैं:-
भारतीय रेल, रक्षा और डाक और दूरसंचार सहित सभी संघ और राज्य सरकार विभाग।
संघ और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित लगभग 1500 सार्वजनिक वाणिज्यक उद्यम जैसे सरकारी कंपनियां और निगम।
संघ और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित और स्वामित्व वाले लगभग 400 गैर वाणिज्यिक स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण।
संघ से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकायों और प्राधिकरणों जैसे स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं जो विकास कार्यक्रमों के कार्यावयन और सेवाऐं प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण आरंभिक स्तर की एजेंसिया हैं।
अपनी भूमिका निभाने के लिए सीएजी की क्या शक्तियां है?
उनके विस्तृत लेखापरीक्षा अधिदेश का प्रयोग निर्बाध रूप से करने के क्रम में अधिनियम का प्रावधान करता है:
उनके लेखापरीक्षा के अधीन किसी कार्यालय या संगठन के निरीक्षण करने की शक्ति।
सभी लेन-देनों की जांच और कार्यकारी से प्रश्नष करने की शक्ति।
किसी भी लेखापरीक्षित सत्त्व से कोई भी रिकार्ड, पेपर, दस्तावेज मांगने की शक्ति।
लेखापरीक्षा की सीमा और स्व रूप पर निर्णय लेने की शक्ति।
सीएजी के क्या कर्त्तव्य है?
जैसा संविधान के अनुच्छेद 149 में उल्लेखित है संसद ने 1971 में सीएजी के कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम नामक एक विस्तृत विधान को अधिनियमित किया जो उनके अधिदेश का वर्णन करता है और सरकार (केंद्र और राज्य) के लगभग प्रत्येक व्यय राजस्व संग्रहण या सहायता/अनुदान प्राप्त करने वाली इकाई उनकी लेखापरीक्षा के अंतर्गत आती हैं। उनका कर्तव्य अग्रलिखित की लेखापरीक्षा करना और उस पर रिपोर्ट तैयार करना है:
संघ और राज्य सरकार के कोष (समेकित निधि) से संबंधित सभी प्राप्तियां और इस से किये गये व्यय।
आकस्मिक व्यय (आकस्मिक निधि) और सरकार द्वारा धारित लोक धन उदाहरणत: केंद्र सहित राज्य स्तर पर डाक बचत, विकास पत्र (लोक लेखा) से संबंधित सभी लेन-देन।
किसी भी सरकारी विभाग में रखे गये सभी व्यापार, उत्पादन, लाभ और हानि खाते, तुलन पत्र और अन्य सहायक खाते।
सभी सरकारी कार्यालयों और विभागों के सभी स्टोर और स्टॉक खाते।
सभी सरकारी कंपनियों और निगमों जैसे ओएनजीसी, सेल आदि के खाते।
सरकारी धन प्राप्त करने वाले सभी स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण जैसे नगर, आईआईएमज़, आईआईटीज़, राज्य स्वास्थ्य संस्थाओं के खाते।
राष्ट्रापति राज्यपाल के अनुरोध या उनके अपनी पहल पर किसी निकाय या प्राधिकरण के खाते।
अधिनियम राज्य सरकारों द्वारा अनुरक्षित सहायक खातों से राज्य सरकारों के खातों के संकलन का प्रावधान करता है।
सीएजी की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चियत की गई है?
संविधान निम्नलिखित रूप से सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा की स्वतंत्र और निष्परक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है:
भारत के राष्ट्र पति द्वारा सीएजी की नियुक्ति
पदच्यूति हेतु विशेष प्रक्रिया (जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश)
भारत की समेकित निधि से वेतन और प्रभारित व्यय (दत्त मत)
उनकी कार्य अवधि समाप्त होने के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में कार्य करने की अनुमति न होना।
हम कौन है?
प्रजातन्त्र में जिनके पास शक्तियां और जिम्मेदारियां होती है वे अपने कार्यों के प्रति जवाहदेह होने चाहिए। इस उद्देश्य हेतु संविधान ने कई संस्थागत तंत्र जैसे न्यायापालिका, सर्तकता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था (साई) को अधिदेशित किया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक और भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएडी) इसके अंतर्गत कार्य करते हुए भारतीय सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था को गठित करते हैं। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखापरीक्षक के रूप में अधिदेशित किया है। इस प्रकार हम जिम्मेदारी सुनिश्चिात करने के लिए एक यंत्र हैं। सविधान का अनुच्छेद 149-151 सीएजी की विशेष भूमिका निर्धारित करती है।
RAC क्या है?
यह "क्षेत्रीय सलाहकार समिति" है जिसमें सभी उपयोगकर्ता कार्यालयों के साथ-साथ हमारे मुख्यालय प्रशिक्षण विंग के सदस्य प्रतिनिधि शामिल हैं। यह समिति साल में दो बार मिलती है, आम तौर पर फरवरी / मार्च और सितंबर / अक्टूबर के महीनों में। RAC/RTI के लिए "वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर" को अंतिम रूप देता है।
क्षेत्रीय सलाहकार समिति द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रमों के लिए उपयोगकर्ता कार्यालयों द्वारा नामांकन किया जाता है।
IA और AD में काम करने वाला व्यक्ति प्रशिक्षण के लिए कैसे नामांकित होता है?
क्षेत्रीय सलाहकार समिति द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रमों के लिए उपयोगकर्ता कार्यालयों द्वारा नामांकन किया जाता है।
क्या IAAD में काम नहीं करने वाला कोई अधिकारी /कर्मचारी आरटीसी दिल्ली में प्रशिक्षित हो सकता है?
नहीं, यह संस्थान केवल भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के तहत काम करने वाले कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है।
RCBKC, नई दिल्ली के उपयोगकर्ता कार्यालय कौन से हैं?
यह केंद्र दिल्ली में स्थित IA & AD कार्यालयों (सामान्य कार्यक्रमों और ईडीपी कार्यक्रमों के लिए) की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करता है।
RCBKC, New Delhi में किसे प्रशिक्षित किया जाता है?
यह केंद्र कुछ विशेष पाठ्यक्रम में ग्रुप ए (समूह के अधिकारियों सहित), उपयोगकर्ता कार्यालयों के ग्रुप बी और सी स्टाफ के साथ-साथ भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के अन्य कार्यालयों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करता है।
अन्य RCBKCs/RCBKIs कहाँ स्थित हैं ?
अन्य RCBKIs यहां स्थित हैं: इलाहाबाद, चेन्नई, हैदराबाद, जम्मू, नागपुर, कोलकाता, मुंबई, रांची , शिलांग, जयपुर एवं आरटीसी बंगलौर में।
क्षेत्रीय क्षमता एवं प्रशिक्षण केंद्र , नई दिल्ली कब अस्तित्व में आया?
वर्ष 1997 में क्षेत्रीय क्षमता एवं प्रशिक्षण केंद्र दिल्ली अस्तित्व में आया।
RCBKC, नई दिल्ली क्या है?
क्षेत्रीय क्षमता एवं प्रशिक्षण केंद्र (RCBKC) नई दिल्ली में स्थित है। यह भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के अंतर्गत आता है। इस विभाग में कुल दस आरटीआई हैं और दो क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र (आरटीसी) "दिल्ली और बंगलौर"।
हम कितने प्रकार के लेखापरीक्ष करते हैं?
लेखापरीक्षा के उद्देश्योंक के आधार पर हम सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा को निम्नलिखित में वर्गीकृत करते है:
अनुपालन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
वित्तीय सत्यापन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
निष्पायदन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
इन परम्परागत लेखापरीक्षा के अतिरिक्त, हम सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रणाली और पर्यावरण मामलों पर भी कई सफल लेखापरीक्षा कर चुके हैं।
हम किसकी लेखापरीक्षा करते हैं?
सीएजी की लेखापरीक्षा के अंतर्गत आने वाले संगठन हैं:-
भारतीय रेल, रक्षा और डाक और दूरसंचार सहित सभी संघ और राज्य सरकार विभाग।
संघ और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित लगभग 1500 सार्वजनिक वाणिज्यक उद्यम जैसे सरकारी कंपनियां और निगम।
संघ और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित और स्वामित्व वाले लगभग 400 गैर वाणिज्यिक स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण।
संघ से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकायों और प्राधिकरणों जैसे स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं जो विकास कार्यक्रमों के कार्यावयन और सेवाऐं प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण आरंभिक स्तर की एजेंसिया हैं।
अपनी भूमिका निभाने के लिए सीएजी की क्या शक्तियां है?
उनके विस्तृत लेखापरीक्षा अधिदेश का प्रयोग निर्बाध रूप से करने के क्रम में अधिनियम का प्रावधान करता है:
उनके लेखापरीक्षा के अधीन किसी कार्यालय या संगठन के निरीक्षण करने की शक्ति।
सभी लेन-देनों की जांच और कार्यकारी से प्रश्नष करने की शक्ति।
किसी भी लेखापरीक्षित सत्त्व से कोई भी रिकार्ड, पेपर, दस्तावेज मांगने की शक्ति।
लेखापरीक्षा की सीमा और स्व रूप पर निर्णय लेने की शक्ति।
सीएजी के क्या कर्त्तव्य है?
जैसा संविधान के अनुच्छेद 149 में उल्लेखित है संसद ने 1971 में सीएजी के कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम नामक एक विस्तृत विधान को अधिनियमित किया जो उनके अधिदेश का वर्णन करता है और सरकार (केंद्र और राज्य) के लगभग प्रत्येक व्यय राजस्व संग्रहण या सहायता/अनुदान प्राप्त करने वाली इकाई उनकी लेखापरीक्षा के अंतर्गत आती हैं। उनका कर्तव्य अग्रलिखित की लेखापरीक्षा करना और उस पर रिपोर्ट तैयार करना है:
संघ और राज्य सरकार के कोष (समेकित निधि) से संबंधित सभी प्राप्तियां और इस से किये गये व्यय।
आकस्मिक व्यय (आकस्मिक निधि) और सरकार द्वारा धारित लोक धन उदाहरणत: केंद्र सहित राज्य स्तर पर डाक बचत, विकास पत्र (लोक लेखा) से संबंधित सभी लेन-देन।
किसी भी सरकारी विभाग में रखे गये सभी व्यापार, उत्पादन, लाभ और हानि खाते, तुलन पत्र और अन्य सहायक खाते।
सभी सरकारी कार्यालयों और विभागों के सभी स्टोर और स्टॉक खाते।
सभी सरकारी कंपनियों और निगमों जैसे ओएनजीसी, सेल आदि के खाते।
सरकारी धन प्राप्त करने वाले सभी स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण जैसे नगर, आईआईएमज़, आईआईटीज़, राज्य स्वास्थ्य संस्थाओं के खाते।
राष्ट्रापति राज्यपाल के अनुरोध या उनके अपनी पहल पर किसी निकाय या प्राधिकरण के खाते।
अधिनियम राज्य सरकारों द्वारा अनुरक्षित सहायक खातों से राज्य सरकारों के खातों के संकलन का प्रावधान करता है।
सीएजी की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चियत की गई है?
संविधान निम्नलिखित रूप से सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा की स्वतंत्र और निष्परक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है:
भारत के राष्ट्र पति द्वारा सीएजी की नियुक्ति
पदच्यूति हेतु विशेष प्रक्रिया (जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश)
भारत की समेकित निधि से वेतन और प्रभारित व्यय (दत्त मत)
उनकी कार्य अवधि समाप्त होने के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में कार्य करने की अनुमति न होना।
हम कौन है?
प्रजातन्त्र में जिनके पास शक्तियां और जिम्मेदारियां होती है वे अपने कार्यों के प्रति जवाहदेह होने चाहिए। इस उद्देश्य हेतु संविधान ने कई संस्थागत तंत्र जैसे न्यायापालिका, सर्तकता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था (साई) को अधिदेशित किया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक और भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएडी) इसके अंतर्गत कार्य करते हुए भारतीय सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था को गठित करते हैं। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखापरीक्षक के रूप में अधिदेशित किया है। इस प्रकार हम जिम्मेदारी सुनिश्चिात करने के लिए एक यंत्र हैं। सविधान का अनुच्छेद 149-151 सीएजी की विशेष भूमिका निर्धारित करती है।
लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों का क्या होता हैं?
संघ के मामले में सीएजी के प्रतिवेदन राष्ट्रशपति को और राज्य मामले में राज्यपाल को प्रस्तुत किये जाते हैं जो उन्हें सदन के समक्ष प्रस्तुत करता है। एक बार सदन में प्रस्तुत किये जाने के बाद, प्रतिवेदन लोक लेखा समिति (पीएसी)/लोक उपक्रम समिति (कोपू) की केंद्रीय और राज्य स्थाई समितियों को स्थाई रूप से संदर्भित हो जाते हैं। ये विशिष्टम समितियां वार्षिक लेखे और उनपर लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की समयबद्ध और गहन संवीक्षा उपलब्ध करवाने के लिए गठित की गई हैं। समितियां लोक हित के सर्वाधिक महत्वपूर्ण निष्कीर्षों और सिफारिशों को हमारे प्रतिवेदनों से चुनते है और उन पर अपनी सुनवाईयों रखते हैं। हम इस कार्य में इन समितियों को अपना तकनीकी सहायता करते हैं। समितियों की सुनवाईयों पर, कार्रवाई/गैर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार कार्यकारी को बुलाया जा सकता है। उनकी जांच के आधार पर, समिति अपने प्रतिवेदन तैयार करते है और विधान मंडल को प्रस्तुत करते है जो समिति की सुनवाईयों, कार्यकारी द्वारा की गई कार्रवाई और प्रशासनिक प्रथाओं और कार्यप्रणालियों को सुधारने के लिए सिफारिशों को शामिल कर सारबद्ध करती है।
हमारे प्रतिवेदन का केंद्र बिंदु क्या है?
लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में अंतिम, पूर्णत: परिपुष्टे लेखापरीक्षा निष्क र्ष होते हैं। ये विभाग द्वारा स्वीकृत की गई है और/या तथ्यातत्मक रूप से साबित की गई और विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। हमारी लेखापरीक्षा का उद्देश्य प्रबंधन में और सरकारी गतिविधियों और कार्यक्रमों में सुधार करना है। हम पहचानी गई त्रुटियों की प्रकृति को सुनिश्चिनत करते हैं कि वे एकाकी या पुनरावर्ती प्रकार की है। हम न केवल सुधारात्मक कार्रवाई को प्रेरित करना चाहते हैं अपितु यह भी सुनिश्चितत करना चाहते हैं कि दोबारा गलती न दोहराई जाये। हम कार्यप्रद्धति, प्रक्रियाएं और प्रसंस्करणों को सुधारने के लिए उचित, सूचित और कार्यान्वयन योग्य सिफारिशें करते हैं।
किस प्रकार के प्रतिवेदन सीएजी प्रस्तुत करता है?
संसद और राज्य विधान मंडलों में प्रस्तुत की गई सीएजी की लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों में राजस्व संग्रहण और सरकार के व्यय को कवर करते हुए अनुपालना और निष्पाईदन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, विधान द्वारा प्रावधान किए गए कुछ स्वायत्त निकायों की कार्य प्रणाली पर पृथक लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, संघ और राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिवेदन और संसद और विधान मंडलों द्वारा पारित किये गये विनियोजन अधिनियमों के अनुपालन पर प्रतिवेदन शामिल होते हैं। सीएजी राज्य विधान मंडलों में राज्यों के प्रमाणित वार्षिक लेखे भी प्रस्तुत करता है जिन्हें वित्त और विनियोजन लेखे कहा जाता है।
अपनी भूमिका निभाने के लिए सीएजी की क्या शक्तियां है?
उनके विस्तृत लेखापरीक्षा अधिदेश का प्रयोग निर्बाध रूप से करने के क्रम में अधिनियम का प्रावधान करता है:
उनके लेखापरीक्षा के अधीन किसी कार्यालय या संगठन के निरीक्षण करने की शक्ति।
सभी लेन-देनों की जांच और कार्यकारी से प्रश्नष करने की शक्ति।
किसी भी लेखापरीक्षित सत्त्व से कोई भी रिकार्ड, पेपर, दस्तावेज मांगने की शक्ति।
लेखापरीक्षा की सीमा और स्व रूप पर निर्णय लेने की शक्ति।
सीएजी के क्या कर्त्तव्य है?
जैसा संविधान के अनुच्छेद 149 में उल्लेखित है संसद ने 1971 में सीएजी के कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम नामक एक विस्तृत विधान को अधिनियमित किया जो उनके अधिदेश का वर्णन करता है और सरकार (केंद्र और राज्य) के लगभग प्रत्येक व्यय राजस्व संग्रहण या सहायता/अनुदान प्राप्त करने वाली इकाई उनकी लेखापरीक्षा के अंतर्गत आती हैं। उनका कर्तव्य अग्रलिखित की लेखापरीक्षा करना और उस पर रिपोर्ट तैयार करना है:
संघ और राज्य सरकार के कोष (समेकित निधि) से संबंधित सभी प्राप्तियां और इस से किये गये व्यय।
आकस्मिक व्यय (आकस्मिक निधि) और सरकार द्वारा धारित लोक धन उदाहरणत: केंद्र सहित राज्य स्तर पर डाक बचत, विकास पत्र (लोक लेखा) से संबंधित सभी लेन-देन।
किसी भी सरकारी विभाग में रखे गये सभी व्यापार, उत्पादन, लाभ और हानि खाते, तुलन पत्र और अन्य सहायक खाते।
सभी सरकारी कार्यालयों और विभागों के सभी स्टोर और स्टॉक खाते।
सभी सरकारी कंपनियों और निगमों जैसे ओएनजीसी, सेल आदि के खाते।
सरकारी धन प्राप्त करने वाले सभी स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण जैसे नगर, आईआईएमज़, आईआईटीज़, राज्य स्वास्थ्य संस्थाओं के खाते।
राष्ट्रापति राज्यपाल के अनुरोध या उनके अपनी पहल पर किसी निकाय या प्राधिकरण के खाते।
अधिनियम राज्य सरकारों द्वारा अनुरक्षित सहायक खातों से राज्य सरकारों के खातों के संकलन का प्रावधान करता है।
सीएजी की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चियत की गई है?
संविधान निम्नलिखित रूप से सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा की स्वतंत्र और निष्परक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है:
भारत के राष्ट्र पति द्वारा सीएजी की नियुक्ति
पदच्यूति हेतु विशेष प्रक्रिया (जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश)
भारत की समेकित निधि से वेतन और प्रभारित व्यय (दत्त मत)
उनकी कार्य अवधि समाप्त होने के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में कार्य करने की अनुमति न होना।
हम कौन है?
प्रजातन्त्र में जिनके पास शक्तियां और जिम्मेदारियां होती है वे अपने कार्यों के प्रति जवाहदेह होने चाहिए। इस उद्देश्य हेतु संविधान ने कई संस्थागत तंत्र जैसे न्यायापालिका, सर्तकता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था (साई) को अधिदेशित किया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक और भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएडी) इसके अंतर्गत कार्य करते हुए भारतीय सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था को गठित करते हैं। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखापरीक्षक के रूप में अधिदेशित किया है। इस प्रकार हम जिम्मेदारी सुनिश्चिात करने के लिए एक यंत्र हैं। सविधान का अनुच्छेद 149-151 सीएजी की विशेष भूमिका निर्धारित करती है।
हम कौन है?
प्रजातन्त्र में जिनके पास शक्तियां और जिम्मेदारियां होती है वे अपने कार्यों के प्रति जवाहदेह होने चाहिए। इस उद्देश्य हेतु संविधान ने कई संस्थागत तंत्र जैसे न्यायापालिका, सर्तकता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था (साई) को अधिदेशित किया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक और भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएडी) इसके अंतर्गत कार्य करते हुए भारतीय सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था को गठित करते हैं। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखापरीक्षक के रूप में अधिदेशित किया है। इस प्रकार हम जिम्मेदारी सुनिश्चिात करने के लिए एक यंत्र हैं। सविधान का अनुच्छेद 149-151 सीएजी की विशेष भूमिका निर्धारित करती है।
IA & AD का आयोजन कैसे किया जाता है?
नई दिल्ली में CAG का कार्यालय IA और AD के ऑडिट, खातों और एंटाइटेलमेंट कार्यों से जुड़ी सभी गतिविधियों का निर्देशन, निगरानी और नियंत्रण करता है। मैदानी स्तर पर 133 कार्यालय हैं: लेखा परीक्षा के लिए प्रत्येक राज्य में महालेखाकार (लेखा परीक्षा) के कार्यालय, लेखाकारों के महालेखाकार (A & E) राज्य खातों के संकलन और अधिकार कार्यों को पूरा करने के लिए, लेखा परीक्षा के प्रधान निदेशक जिम्मेदार सभी सिविल मंत्रालयों और विभागों, रक्षा, रेलवे, डाक और संचार, सदस्य लेखा परीक्षा बोर्ड के कार्यालयों सहित केंद्रीय गतिविधियों का लेखा-जोखा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के ऑडिट के साथ सौंपा गया। विदेशों में भारतीय मिशनों के लेखा-परीक्षण के लिए विदेशी कार्यालय।
कैग अपनी भूमिका कैसे निभाता है?
सीएजी को उनकी संवैधानिक भूमिका का निर्वहन करने के लिए भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग (IA & AD) द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। IA & AD के शीर्ष और मध्य प्रबंधकीय स्तर पर लगभग 600 भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा सेवा (IA & AS) अधिकारी हैं। उन्हें या तो सीधे यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से भर्ती किया जाता है या समूह बी (पर्यवेक्षी स्टाफ) से पदोन्नति द्वारा शामिल किया जाता है। अधीनस्थ कैडर हैं जिनकी ताकत लगभग 47000 है। वे वरिष्ठ लेखा परीक्षा / लेखा अधिकारियों, लेखा परीक्षा अधिकारियों और सहायक लेखा अधिकारियों और एक सहायक स्टाफ कैडर (ग्रुप सी) के राजपत्रित पर्यवेक्षी कैडर (ग्रुप बी) से मिलकर बने होते हैं।
हमारी रिपोर्ट किस पर ध्यान केंद्रित करती है?
एक ऑडिट रिपोर्ट में अंतिम, पूरी तरह से अनुमोदित ऑडिट निष्कर्ष शामिल हैं। इनको विभाग द्वारा स्वीकार किया जा सकता है और / या तथ्यात्मक रूप से साबित कर दिए गए हैं और विधानमंडल के समक्ष रखे जाने के लिए पर्याप्त हैं। हमारी ऑडिट का उद्देश्य सरकार की गतिविधियों और कार्यक्रमों के प्रबंधन और संचालन में सुधार लाना है। हम पहचान किए गए अपर्याप्तताओं की प्रकृति का निर्धारण करना चाहते हैं, चाहे वे अलग-थलग हों या आवर्ती हों। हम न केवल सुधारात्मक कार्रवाई को प्रोत्साहित करना चाहते हैं बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि चूक दोबारा न हो। हम सिस्टम, प्रक्रिया और प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए उपयुक्त, सूचित और कार्यान्वयन योग्य सिफारिशें करते हैं।
CAG किस प्रकार की रिपोर्ट लाता है?
संसद और राज्य विधानसभाओं को सौंपी गई कैग की ऑडिट रिपोर्ट में सरकार के राजस्व संग्रह और व्यय को कवर करते हुए अनुपालन और प्रदर्शन लेखा परीक्षा रिपोर्ट शामिल हैं, कुछ स्वायत्त निकायों के कामकाज पर अलग ऑडिट रिपोर्ट, जैसा कि कानून द्वारा प्रदान किया गया है, केंद्रीय की वित्तीय स्थिति पर रिपोर्ट और राज्य सरकारें और संसद और विधानसभाओं द्वारा पारित विनियोग अधिनियमों के पालन पर रिपोर्ट।सीएजी राज्यों के प्रमाणित वार्षिक खातों को भी प्रस्तुत करता है, जिन्हें वित्त और विनियोग खातों के रूप में जाना जाता है, राज्य विधानसभाओं को।
हम किसका ऑडिट करते हैं?
CAG की लेखापरीक्षा के अधीन संगठन निम्नलिखित हैं:
• भारतीय रेल, रक्षा और डाक और दूरसंचार सहित सभी संघ और राज्य सरकार के विभाग।
• संघ और राज्य सरकारों, अर्थात् सरकारी कंपनियों और निगमों द्वारा नियंत्रित लगभग 1500 सार्वजनिक वाणिज्यिक उद्यम।
• लगभग 400 गैर-वाणिज्यिक स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण जिनके पास संघ या राज्यों के स्वामित्व या नियंत्रण हैं।
• निकाय और प्राधिकरणों ने संघ से कुछ स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थानों को पर्याप्त रूप से वित्तपोषित किया जो विकास कार्यक्रमों और सेवाओं के वितरण के लिए महत्वपूर्ण जमीनी जड़ें हैं।
कौन इस वेबसाइट का रखरखाव करता है?
वेबसाइट व्यवस्थापक
प्र. लेखापरीक्षा रिपोर्ट का क्या होता है?
उ. सीएजी की रिपोर्ट संघ के मामले में राष्ट्रपति को तथा राज्य के मामले में राज्यपाल को सौंपी जाती है, जो उन्हें सदन के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। सदन में प्रस्तुत किए जाने के पश्चात, रिपोर्टें स्थायी रूप से केंद्रीय तथा राज्य लोक लेखा समितियों (पीएसी)/सार्वजनिक उपक्रम समितियों (सीओपीयू) को भेज दी जाती हैं। वार्षिक लेखों तथा उन पर लेखापरीक्षा रिपोर्टों की समयबद्ध तथा गहन जांच की सुविधा के लिए इन विशेष समितियों का गठन किया गया है। समितियां हमारी रिपोर्टों में से उन निष्कर्षों तथा सिफारिशों का चयन करती हैं, जिन्हें वे जनहित के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण मानती हैं तथा उन पर सुनवाई की व्यवस्था करती हैं। हम इस कार्य में समितियों को तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं। समितियों की सुनवाई में कार्यपालिका को उसके कार्यों/अकार्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जा सकता है। अपनी जांच के आधार पर, समितियां अपनी रिपोर्ट तैयार करती हैं तथा विधानमंडल को प्रस्तुत करती हैं, जिसमें समिति की सुनवाई, कार्यपालिका द्वारा की गई कार्रवाई का सारांश होता है तथा प्रशासनिक प्रथाओं तथा प्रक्रियाओं में सुधार के लिए सिफारिशें शामिल होती हैं।
प्र. लेखापरीक्षा रिपोर्ट तैयार करने का नया तरीका क्या है?
उ. इस पुनर्गठन के अनुसरण में, 2011-12 से, भारत के संविधान के प्रावधानों के अनुसार, राज्यपाल को प्रस्तुत करने के लिए CAG द्वारा क्षेत्रवार राज्य सरकार के विभागों को कवर करने वाली लेखापरीक्षा रिपोर्टें अलग से तैयार की जा रही हैं।
प्र. ड्राफ्ट पैराग्राफ क्या हैं?
उ. डी.पी. कदाचार, मानदंडों से असाधारण विचलन आदि के महत्वपूर्ण मामलों को उजागर करते हैं जो एक आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डी.डी.ओ.) के लिए विशिष्ट हैं। हालांकि, यह किसी विभाग/संगठन के कामकाज या किसी योजना/कार्यक्रम के समग्र कार्यान्वयन पर निष्कर्ष नहीं निकालता है, और इसलिए यह निर्णयकर्ताओं (सरकार, संगठनों के प्रमुख, आदि) की सहायता के लिए एक प्रभावी उपकरण के रूप में काम नहीं करता है।
प्र. लेखापरीक्षा के निष्कर्षों की रिपोर्ट कैसे की जाती है?
उ. लेखापरीक्षा की गई इकाई से संबंधित निष्कर्षों की रिपोर्ट, निरीक्षण रिपोर्ट (आईआर) के माध्यम से की जाती है। इकाई का लेखापरीक्षा करने वाली फील्ड पार्टी ड्राफ्ट आईआर तैयार करती है जिसमें अनियमितता और नियमों, विनियमों आदि के गैर-अनुपालन के महत्वपूर्ण मामले और कुछ प्रदर्शन संबंधी मामले सामने आते हैं। कुछ अवलोकन (अनियमितता और नियमों का गैर-अनुपालन आदि के गंभीर मामले) सीएजी की लेखापरीक्षा रिपोर्ट में ड्राफ्ट पैराग्राफ (डीपी) के रूप में शामिल किए जा सकते हैं।
प्र. लेखापरीक्षा मानदंड क्या है?
उ. लेखापरीक्षा मानदंड मानकों, कानूनों, नियमों और विनियमों, उप-नियमों, संहिताओं, मैनुअल, सरकारी आदेशों, निर्देशों, विभागीय निर्देशों, प्रदर्शन के लिए बेंचमार्क आदि को इंगित करते हैं, जिनके आधार पर संबंधित इकाई / लागू प्राधिकरण के अनुपालन / प्रदर्शन को मापा जाता है। सभी लेखापरीक्षा, लेखापरीक्षा मानदंड के अनुसार किए जाते हैं, जिसे आमतौर पर लेखापरीक्षा में अवलोकन करते समय उद्धृत किया जाता है।
प्र. लेखापरीक्षा उद्देश्य कैसे तैयार किये जाते हैं?
उ. लेखापरीक्षा उद्देश्य विषय से संबंधित होंगे और संबंधित योजना/संगठनात्मक उद्देश्यों या लागू कानूनों/नियमों से प्रवाहित होंगे।
प्र. लेखापरीक्षा योजना में शामिल करने के लिए विषयों का चयन कैसे किया जाता है?
उ. ऊपर उल्लिखित जोखिम मूल्यांकन के आधार पर, निष्पादन और अनुपालन लेखापरीक्षा के विषयों का निर्णय लिया जाता है और उन्हें वार्षिक लेखापरीक्षा योजना में शामिल किया जाता है।
प्र. वार्षिक लेखापरीक्षा योजना क्या है?
उ. वार्षिक लेखापरीक्षा योजना आगामी वर्ष के दौरान की जाने वाली लेखापरीक्षा की योजना है।
प्र. लेखापरीक्षा की योजना कैसे बनाई जाती है?
उ. लेखापरीक्षा प्रक्रिया, व्यय, गतिविधियों की गंभीरता/जटिलता, सरकार द्वारा गतिविधि को दी गई प्राथमिकता, प्रत्यायोजित वित्तीय शक्तियों का स्तर, तथा आंतरिक नियंत्रणों का मूल्यांकन और हितधारकों की चिंताओं के आधार पर विभाग/संगठन/स्वायत्त निकाय/योजना आदि के जोखिम के आकलन से शुरू होती है। इस अभ्यास में पिछले लेखापरीक्षा निष्कर्षों पर भी विचार किया जाता है।
प्र. सीएजी को लेखापरीक्षा का अधिकार कहां से मिलता है?
उ. सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 149 और 151 तथा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 (डीपीसी अधिनियम) से प्राप्त होता है। विभिन्न लेखापरीक्षाओं के लिए सिद्धांत और कार्यप्रणाली सीएजी द्वारा जारी लेखापरीक्षा मानकों और लेखापरीक्षा और लेखा विनियमन, 2007 में निर्धारित की गई हैं।
प्र. सीएजी क्या करता है?
उ. सीएजी भारत सरकार, राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों के खातों की लेखापरीक्षा करने तथा राज्य सरकारों के खातों को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।
CoTP का मतलब क्या है?
प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कैलेंडर (CoTP) में RTI, हैदराबाद द्वारा दिए जाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल होते हैं। यह प्रत्येक उपयोगकर्ता कार्यालय को नियत किया
गया स्लॉट की संख्या के साथ जनरल और आईएस दोनों पाठ्यक्रमों के विस्तृत शेड्यूल प्रदान करता है।
क्षेत्रीय सलाहकार समिति की भूमिका क्या है?
"क्षेत्रीय सलाहकार समिति" जिसमें सभी उपयोगकर्ता कार्यालयों के साथ-साथ हमारे मुख्यालय प्रशिक्षण विंग के सदस्य प्रतिनिधि शामिल हैं। यह समिति साल में दो बार मिलती है, आम तौर पर फरवरी / मार्च और सितंबर / अक्टूबर के महीनों में। आरएसी उपयोगकर्ता कार्यालयों द्वारा निर्दिष्ट प्रशिक्षण की आवश्यकता विश्लेषण के आधार पर आरटीआई के लिए "वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर" को अंतिम रूप देता है। बैठकों के दौरान इस प्रशिक्षण संस्थान के कामकाज की समीक्षा भी करें।
IA & AD का कौन सा उपयोगकर्ता कार्यालय आरटीआई, हैदराबाद के अधिकार क्षेत्र में आता है?
आरटीआई, हैदराबाद भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के उन्नीस कार्यालयों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करता है जो आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों में मौजूद हैं।
जब क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान, हैदराबाद अस्तित्व में आया?
क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान, हैदराबाद की स्थापना जुलाई 2018 में हुई थी
कौन सा अनुभाग कार्यालय में एसएएस, इंसेंटिव, सीपीडी परीक्षा आयोजित करता है
प्रशासन 1
आईएएंडएडी कैसे संगठित किया गया है?
सीएजी का कार्यालय, नई दिल्ली लेखापरीक्षा, लेखा और आईएएंडएडी के हकदारी कार्यों से संबंधित सभी गतिविधियों को निदेशित, मॉनीटर और नियंत्रित करता है। क्षेत्रीय स्तर पर 133 कार्यालय है:
• प्रत्येक राज्य में महालेखाकार/लेखापरीक्षा का कार्यालय लेखापरीक्षा के लिए उत्तरदायी है ।
• राज्य लेखे के संकलन के लिए हकदारी का पालन करने के लिए महालेखाकार (ले. व ह.) का कार्यलय ।
• सभी सिविल मंत्रालयों और विभागों रक्षा, रेलवे, डाक और दूरसंचार सहित संघ गतिविधियों की लेखापरीक्षा हेतु प्रधान निदेशक लेखापरीक्षा उत्तरदायी है ।
• केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की लेखापरीक्षा का कार्य सदस्य लेखापरीक्षा बोर्ड के कार्यालय को सौंपा गया है।
• विदेशों में भारतीय मिशन की लेखापरीक्षा के लिए विदेश स्थित कार्यालय।
सीएजी अपनी भूमिका कैसे निभाता है?
सीएजी का अपनी संविधानात्मक भूमिका को निभाने के लिए भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएंडएडी) द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। आईएएंडएडी के शीर्ष और मध्यर प्रबंधकीय स्तर पर लगभग 600 भारतीय लेखा और लेखापरीक्षा सेवा (आईएएंडएएस) अधिकारी हैं। उन्हें या तो यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा द्वारा सीधे नियुक्त किया जाता है या ग्रुप बी (पर्यवेक्षण स्टाफ) से पदोन्नत कर शामिल किया जाता है। कुछ अधीनस्थ संवर्ग भी है जिनकी संख्याै लगभग 47000 है। इसमें राजपत्रित पर्यवेक्षण संवर्ग (ग्रुप बी) में वरिष्ठव लेखापरीक्षा/लेखाअधिकारी, लेखापरीक्षा अधिकारी और सहायक लेखापरीक्षा अधिकारी तथा सहायक स्टाफ संवर्ग (ग्रुप सी) शामिल हैं।
लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों का क्या होता हैं?
संघ के मामले में सीएजी के प्रतिवेदन राष्ट्रशपति को और राज्य मामले में राज्यपाल को प्रस्तुत किये जाते हैं जो उन्हें सदन के समक्ष प्रस्तुत करता है। एक बार सदन में प्रस्तुत किये जाने के बाद, प्रतिवेदन लोक लेखा समिति (पीएसी)/लोक उपक्रम समिति (कोपू) की केंद्रीय और राज्य स्थाई समितियों को स्थाई रूप से संदर्भित हो जाते हैं। ये विशिष्टम समितियां वार्षिक लेखे और उनपर लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की समयबद्ध और गहन संवीक्षा उपलब्ध करवाने के लिए गठित की गई हैं। समितियां लोक हित के सर्वाधिक महत्वपूर्ण निष्कीर्षों और सिफारिशों को हमारे प्रतिवेदनों से चुनते है और उन पर अपनी सुनवाईयों रखते हैं। हम इस कार्य में इन समितियों को अपना तकनीकी सहायता करते हैं। समितियों की सुनवाईयों पर, कार्रवाई/गैर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार कार्यकारी को बुलाया जा सकता है। उनकी जांच के आधार पर, समिति अपने प्रतिवेदन तैयार करते है और विधान मंडल को प्रस्तुत करते है जो समिति की सुनवाईयों, कार्यकारी द्वारा की गई कार्रवाई और प्रशासनिक प्रथाओं और कार्यप्रणालियों को सुधारने के लिए सिफारिशों को शामिल कर सारबद्ध करती है।
हमारे प्रतिवेदन का केंद्र बिंदु क्या है?
लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में अंतिम, पूर्णत: परिपुष्टे लेखापरीक्षा निष्क र्ष होते हैं। ये विभाग द्वारा स्वीकृत की गई है और/या तथ्यातत्मक रूप से साबित की गई और विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। हमारी लेखापरीक्षा का उद्देश्य प्रबंधन में और सरकारी गतिविधियों और कार्यक्रमों में सुधार करना है। हम पहचानी गई त्रुटियों की प्रकृति को सुनिश्चिनत करते हैं कि वे एकाकी या पुनरावर्ती प्रकार की है। हम न केवल सुधारात्मक कार्रवाई को प्रेरित करना चाहते हैं अपितु यह भी सुनिश्चितत करना चाहते हैं कि दोबारा गलती न दोहराई जाये। हम कार्यप्रद्धति, प्रक्रियाएं और प्रसंस्करणों को सुधारने के लिए उचित, सूचित और कार्यान्वयन योग्य सिफारिशें करते हैं।
किस प्रकार के प्रतिवेदन सीएजी प्रस्तुत करता है?
संसद और राज्य विधान मंडलों में प्रस्तुत की गई सीएजी की लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों में राजस्व संग्रहण और सरकार के व्यय को कवर करते हुए अनुपालना और निष्पाईदन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, विधान द्वारा प्रावधान किए गए कुछ स्वायत्त निकायों की कार्य प्रणाली पर पृथक लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, संघ और राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिवेदन और संसद और विधान मंडलों द्वारा पारित किये गये विनियोजन अधिनियमों के अनुपालन पर प्रतिवेदन शामिल होते हैं। सीएजी राज्य विधान मंडलों में राज्यों के प्रमाणित वार्षिक लेखे भी प्रस्तुत करता है जिन्हें वित्त और विनियोजन लेखे कहा जाता है।
हम कितने प्रकार के लेखापरीक्ष करते हैं?
लेखापरीक्षा के उद्देश्योंक के आधार पर हम सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा को निम्नलिखित में वर्गीकृत करते है:
• अनुपालन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
• वित्तीय सत्यापन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
• निष्पायदन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
• इन परम्परागत लेखापरीक्षा के अतिरिक्त, हम सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रणाली और पर्यावरण मामलों पर भी कई सफल लेखापरीक्षा कर चुके हैं।
कैग की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित की जाती है?
संविधान कैग द्वारा ऑडिट की स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है:
1. भारत के राष्ट्रपति द्वारा उनकी नियुक्ति
2. हटाने की विशेष प्रक्रिया (सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह)
3. वेतन और व्यय भारत के समेकित कोष में आरोपित (वोट नहीं)
4. उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में उनकी नियुक्ति को रद्द करना
SAS kya hai
Subordinate Audit Services Exam
AG kaun hai
श्री रामावतार शर्मा
हम किसकी लेखापरीक्षा करते हैं?
सीएजी की लेखापरीक्षा के अंतर्गत आने वाले संगठन हैं:-
• भारतीय रेल, रक्षा और डाक और दूरसंचार सहित सभी संघ और राज्य सरकार विभाग।
• संघ और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित लगभग 1500 सार्वजनिक वाणिज्यक उद्यम जैसे सरकारी कंपनियां और निगम।
• संघ और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित और स्वामित्व वाले लगभग 400 गैर वाणिज्यिक स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण।
• संघ से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकायों और प्राधिकरणों जैसे स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं जो विकास कार्यक्रमों के कार्यावयन और सेवाऐं प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण आरंभिक स्तर की एजेंसिया हैं।
अपनी भूमिका निभाने के लिए सीएजी की क्या शक्तियां है?
उनके विस्तृत लेखापरीक्षा अधिदेश का प्रयोग निर्बाध रूप से करने के क्रम में अधिनियम का प्रावधान करता है:
• उनके लेखापरीक्षा के अधीन किसी कार्यालय या संगठन के निरीक्षण करने की शक्ति।
• सभी लेन-देनों की जांच और कार्यकारी से प्रश्नष करने की शक्ति।
• किसी भी लेखापरीक्षित सत्त्व से कोई भी रिकार्ड, पेपर, दस्तावेज मांगने की शक्ति।
• लेखापरीक्षा की सीमा और स्व रूप पर निर्णय लेने की शक्ति।
सीएजी के क्या कर्त्तव्य है?
जैसा संविधान के अनुच्छेद 149 में उल्लेखित है संसद ने 1971 में सीएजी के कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम नामक एक विस्तृत विधान को अधिनियमित किया जो उनके अधिदेश का वर्णन करता है और सरकार (केंद्र और राज्य) के लगभग प्रत्येक व्यय राजस्व संग्रहण या सहायता/अनुदान प्राप्त करने वाली इकाई उनकी लेखापरीक्षा के अंतर्गत आती हैं। उनका कर्तव्य अग्रलिखित की लेखापरीक्षा करना और उस पर रिपोर्ट तैयार करना है:
• संघ और राज्य सरकार के कोष (समेकित निधि) से संबंधित सभी प्राप्तियां और इस से किये गये व्यय।
• आकस्मिक व्यय (आकस्मिक निधि) और सरकार द्वारा धारित लोक धन उदाहरणत: केंद्र सहित राज्य स्तर पर डाक बचत, विकास पत्र (लोक लेखा) से संबंधित सभी लेन-देन।
• किसी भी सरकारी विभाग में रखे गये सभी व्यापार, उत्पादन, लाभ और हानि खाते, तुलन पत्र और अन्य सहायक खाते।
• सभी सरकारी कार्यालयों और विभागों के सभी स्टोर और स्टॉक खाते।
• सभी सरकारी कंपनियों और निगमों जैसे ओएनजीसी, सेल आदि के खाते।
• सरकारी धन प्राप्त करने वाले सभी स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण जैसे नगर, आईआईएमज़, आईआईटीज़, राज्य स्वास्थ्य संस्थाओं के खाते।
• राष्ट्रापति राज्यपाल के अनुरोध या उनके अपनी पहल पर किसी निकाय या प्राधिकरण के खाते।
अधिनियम राज्य सरकारों द्वारा अनुरक्षित सहायक खातों से राज्य सरकारों के खातों के संकलन का प्रावधान करता है।
सीएजी की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चियत की गई है?
संविधान निम्नलिखित रूप से सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा की स्वतंत्र और निष्परक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है:
• भारत के राष्ट्र पति द्वारा सीएजी की नियुक्ति
• पदच्यूति हेतु विशेष प्रक्रिया (जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश)
• भारत की समेकित निधि से वेतन और प्रभारित व्यय (दत्त मत)
• उनकी कार्य अवधि समाप्त होने के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में कार्य करने की अनुमति न होना।
हम कौन है?
प्रजातन्त्र में जिनके पास शक्तियां और जिम्मेदारियां होती है वे अपने कार्यों के प्रति जवाहदेह होने चाहिए। इस उद्देश्य हेतु संविधान ने कई संस्थागत तंत्र जैसे न्यायापालिका, सर्तकता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था (साई) को अधिदेशित किया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक और भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएडी) इसके अंतर्गत कार्य करते हुए भारतीय सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था को गठित करते हैं। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखापरीक्षक के रूप में अधिदेशित किया है। इस प्रकार हम जिम्मेदारी सुनिश्चिात करने के लिए एक यंत्र हैं। सविधान का अनुच्छेद 149-151 सीएजी की विशेष भूमिका निर्धारित करती है।
हम कौन है ?
लोकतंत्र में, सत्ता की जिम्मेदारी संभालने वाले और अपने कार्यों के लिए जवाबदेह होना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए संविधान ने कई संस्थागत तंत्रों जैसे न्यायपालिका, सतर्कता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थान (SAI) को अनिवार्य किया है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) और भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग (IAAD) उसके अधीन कार्य कर रहे हैं। भारत के सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थान का गठन। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखा परीक्षक के रूप में जनादेश दिया है। इस प्रकार हम जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक साधन हैं। संविधान के अनुच्छेद 149-151 में सीएजी की अनूठी भूमिका है।
सीएजी को अपनी भूमिका निभाने के लिए कौन सी शक्तियां हैं?
अधिनियम के लिए अधिनियम द्वारा प्रदान किए गए अनपेक्षित तरीके से अपने व्यापक ऑडिट जनादेश को पूरा करने के लिए:
किसी भी कार्यालय या संगठन को उसकी लेखापरीक्षा के अधीन निरीक्षण करने की शक्ति।
सभी लेनदेन की जांच करने और कार्यकारी पर सवाल उठाने की शक्ति।
किसी भी लेखा परीक्षा इकाई से किसी भी रिकॉर्ड, कागजात, दस्तावेजों के लिए कॉल करने की शक्ति।
ऑडिट की सीमा और तरीके तय करने की शक्ति।
सीएजी के कर्तव्य क्या हैं?
जैसा कि संविधान के अनुच्छेद 149 में परिकल्पित है, संसद ने 1971 में कैग के कर्तव्यों, शक्तियों और शर्तों अधिनियम नामक एक विस्तृत कानून बनाया, जिसमें उनके जनादेश का वर्णन किया गया है और सरकार का लगभग हर खर्च, राजस्व एकत्र करना या सहायता / अनुदान प्राप्त करना शामिल है (केंद्र) और (स्टेट्स) अपने ऑडिट डोमेन के तहत। उनके कर्तव्यों का लेखा-जोखा और रिपोर्ट करना है:
संघ और राज्य सरकारों के कॉफ़र्स (समेकित निधि) से सभी प्राप्तियां और व्यय।
आपातकालीन व्यय (आकस्मिक निधि कहा जाता है) से संबंधित सभी लेनदेन और सरकार द्वारा आयोजित जनता के धन से संबंधित है, डाक बचत, विकास पत्र (जिसे लोक लेखा कहा जाता है) केंद्रीय और राज्य स्तरों पर।
किसी भी सरकारी विभाग में रखे गए सभी ट्रेडिंग, विनिर्माण, लाभ और हानि खाते, बैलेंस शीट और अन्य सहायक खाते।
सभी सरकारी कार्यालयों और विभागों के सभी स्टोर और स्टॉक खाते।
सभी सरकारी कंपनियों और निगमों के खाते उदा। ONGC, SAIL आदि।
सरकारी धन प्राप्त करने वाले सभी स्वायत्त निकायों और प्राधिकरणों के खाते उदा। नगर निकाय, आईआईएम, आईआईटी, राज्य स्वास्थ्य समाज।
राष्ट्रपति / राज्यपाल के अनुरोध पर या स्वयं की पहल पर किसी निकाय या प्राधिकरण के खाते।
अधिनियम में राज्य सरकारों के सहायक खातों से राज्य सरकारों के खातों के संकलन का भी प्रावधान है।
सीएजी की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित की जाती है?
संविधान कैग द्वारा ऑडिट की स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है:
भारत के राष्ट्रपति द्वारा उनकी नियुक्ति
हटाने की विशेष प्रक्रिया (सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह)
वेतन और व्यय भारत के समेकित कोष में आरोपित (वोट नहीं)
उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में उनकी नियुक्ति को रद्द करना
हम कौन है?
लोकतंत्र में, सत्ता की जिम्मेदारी संभालने वाले और अपने कार्यों के लिए जवाबदेह होना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए संविधान ने कई संस्थागत तंत्रों जैसे न्यायपालिका, सतर्कता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थान (SAI) को अनिवार्य किया है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) और भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग (IAAD) उसके अधीन कार्य कर रहे हैं। भारत के सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थान का गठन। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखा परीक्षक के रूप में जनादेश दिया है। इस प्रकार हम जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक साधन हैं। संविधान के अनुच्छेद 149-151 में सीएजी की अनूठी भूमिका है।
कौन है सीएजी ?
श्री राजीव महृषि
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक
हम कौन है?
लोकतंत्र में, सत्ता की जिम्मेदारी संभालने वाले और अपने कार्यों के लिए जवाबदेह होना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए संविधान ने कई संस्थागत तंत्रों जैसे न्यायपालिका, सतर्कता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थान (SAI) को अनिवार्य किया है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) और भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग (IAAD) उसके अधीन कार्य कर रहे हैं। भारत के सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थान का गठन। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखा परीक्षक के रूप में जनादेश दिया है। इस प्रकार हम जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक साधन हैं। संविधान के अनुच्छेद 149-151 में सीएजी की अनूठी भूमिका है
cag ke bare main
भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक
प्र. भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) कौन है?
उ. भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) एक प्राधिकरण है, जिसे भारत के संविधान के अध्याय V के तहत स्थापित किया गया है। वे भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग का प्रमुख हैं।
आरटीआई के तहत सूचना शुल्क/आवेदन शुल्क किसके पक्ष में निकाला जाना है?
सूचना शुल्क/आवेदन शुल्क बैंक ड्राफ्ट/बैंकर चेक/आईपीओ के रुप में जमा किया जाना है और लेखा अधिकारी (नकद), कार्यालय प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), ओडिशा, भुवनेश्वर के पक्ष में तैयार किया जाना है।
प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), ओडिशा, भुवनेश्वर के कार्यालय में सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत कौन सीपीआईओ और अपीलीय प्राधिकारी है?
प्रथम अपीलीय प्राधिकारीः श्री डी साहू, प्रधान महालेखाकार (ले एवं हक), ओडिशा, भुवनेश्वर
सीपीआईओः श्री मनोज एक्का, वरिष्ठ उपमहालेखाकार (प्रशासन), कार्यालय प्रधान महालेखाकार (ले एवं हक), ओडिशा, भुवनेश्वर
राज्य सरकार का खाता कैसे बनाया जाता है?
प्रधान महालेखाकार (ले एवं हक) को विभिन्न कोषागारों, पीडब्ल्यू मंडलों, वन मंडलों और अन्य राज्यों से एवं भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के पीओओ स्तर पर होने वाले सभी भुगतानों और प्राप्तियों के संबंध में मूल वाउचर और चालान प्राप्त होते हैं । इसे भारतीय रिजर्व बैंक से राज्य की ऋण सेवा के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए लेन-देन के संबंध में भी जानकारी प्राप्त होती है। कार्यालय उपरोक्त सूचना के आधार पर खातों का संकलन करता है और महीने के अंत में एमसीए और वर्ष के अंत में वित्तीय खातों और विनियोग खातों को लाता है।
प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), ओडिशा, भुवनेश्वर का कार्य क्या है?
प्रधान महालेखाकार (ले. एवं हक.) भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक के अधिन काम करता है, राज्य सरकार के खातों (जीपीएफ खातों और दीर्घकालिक अग्रिमों सहित) का रखरखाव करता है; पेंशन और जीपीएफ अंतिम भुगतान जैसे सेवानिवृत्ति लाभों का प्राधिकार। यह भारत सरकार, अंतर-सरकारी निपटान से राज्य को प्राप्त ऋण और अग्रिमों का अनुरक्षण करता है और राज्य सरकार के विनियोग खाते और वित्त खाते तैयार करता है ।
कार्यालय का वेब प्रशासक कौन है
वरिष्ठ उप महालेखाकार (प्रशासन)
When should subscription be stopped and case forwarded for milan ?
Milan case must be forwarded to A.G. Office with original GPF passbook immediately just after the regular subscription is stopped. i.e. before six months of retirement.
accounts
accounts
हम कौन है?
प्रजातन्त्र में जिनके पास शक्तियां और जिम्मेदारियां होती है वे अपने कार्यों के प्रति जवाहदेह होने चाहिए। इस उद्देश्य हेतु संविधान ने कई संस्थागत तंत्र जैसे न्यायापालिका, सर्तकता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था (साई) को अधिदेशित किया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक और भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएडी) इसके अंतर्गत कार्य करते हुए भारतीय सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था को गठित करते हैं। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखापरीक्षक के रूप में अधिदेशित किया है। इस प्रकार हम जिम्मेदारी सुनिश्चिात करने के लिए एक यंत्र हैं। सविधान का अनुच्छेद 149-151 सीएजी की विशेष भूमिका निर्धारित करती है।
सीएजी की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चियत की गई है?
संविधान निम्नलिखित रूप से सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा की स्वतंत्र और निष्परक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है:
भारत के राष्ट्र पति द्वारा सीएजी की नियुक्ति
पदच्यूति हेतु विशेष प्रक्रिया (जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश)
भारत की समेकित निधि से वेतन और प्रभारित व्यय (दत्त मत)
उनकी कार्य अवधि समाप्त होने के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में कार्य करने की अनुमति न होना।
हम कौन है?
प्रजातन्त्र में जिनके पास शक्तियां और जिम्मेदारियां होती है वे अपने कार्यों के प्रति जवाहदेह होने चाहिए। इस उद्देश्य हेतु संविधान ने कई संस्थागत तंत्र जैसे न्यायापालिका, सर्तकता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था (साई) को अधिदेशित किया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक और भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएडी) इसके अंतर्गत कार्य करते हुए भारतीय सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था को गठित करते हैं। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखापरीक्षक के रूप में अधिदेशित किया है। इस प्रकार हम जिम्मेदारी सुनिश्चिात करने के लिए एक यंत्र हैं। सविधान का अनुच्छेद 149-151 सीएजी की विशेष भूमिका निर्धारित करती है।
कैग की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित की जाती है?
संविधान कैग द्वारा ऑडिट की स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है:
भारत के राष्ट्रपति द्वारा उनकी नियुक्ति
हटाने की विशेष प्रक्रिया (सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की तरह)
वेतन और व्यय भारत के समेकित कोष में आरोपित (वोट नहीं)
कार्यकाल समाप्त होने के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में उनकी नियुक्ति को रोक
हम कौन है?
लोकतंत्र में, सत्ता की जिम्मेदारी संभालने वाले और अपने कार्यों के लिए जवाबदेह होना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए संविधान ने कई संस्थागत तंत्र जैसे न्यायपालिका, सतर्कता निकाय और एक स्वतंत्र सुप्रीम ऑडिट इंस्टीट्यूशन (SAI) को अनिवार्य किया है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) और भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग (IAAD) उसके अधीन कार्य कर रहे हैं। भारत के सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थान का गठन। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखा परीक्षक के रूप में जनादेश दिया है। इस प्रकार हम जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक साधन हैं। संविधान के अनुच्छेद 149-151 में सीएजी की अनूठी भूमिका है।
आईएएडी में कार्यरत कर्मचारी को प्रशिक्षण के लिए कैसे नामित किया जाता है?
प्रशिक्षण का नामांकन उपयोगकर्ता कार्यालयों की आवश्यकता के अनुसार पाठ्यक्रम में स्लॉट प्रदान करके किया जाता है जो प्रशिक्षण कार्यक्रम का वार्षिक कैलेंडर (सीओटीपी) पर आधारित होता है जिसे आरएसी बैठक में अंतिम रूप दिया जाता है।
क्या आईएएडी में काम नहीं करने वाले किसी बाहरी व्यक्ति को आर सी बी के आई नागपुर में प्रशिक्षित किया जा सकता है?
नहीं, यह संस्थान केवल भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के तहत काम करने वाले कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है। विशेष मामलों में, हम राज्य सरकार के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण आयोजित करते हैं जो विभिन्न शर्तों के अधीन हैं।
आर सी बी के आई , नागपुर के उपभोक्ता कार्यालय कौन हैं?
भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के कुल 17 उपयोगकर्ता कार्यालय हैं। आरटीआई, नागपुर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों में स्थित कार्यालयों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करता है।
आर सी बी के आई में किसे प्रशिक्षित किया जाता है?
यह संस्थान हमारे उपभोक्ता कार्यालयों के प्रशिक्षण आवश्यकताओं के साथ-साथ कुछ विशेष पाठ्यक्रमों में भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग के अन्य कार्यालयों को भी प्रशिक्षित करता है।
क्षेत्रीय क्षमता निर्माण एवं ज्ञान संस्थान (आर सी बी के आई ) क्या है?
आर सी बी के आई एक क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान है जो नागपुर में स्थित है। यह भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग के अंतर्गत आता है। इस विभाग में कुल दस ऐसे आर सी बी के आई हैं। आर सी बी के आई आईएएडी के प्रशिक्षण, अनुसंधान और विकास कार्य को पूरा करता है। दस आर सी बी के आई के अलावा, दो आर सी बी के सी भी हैं। ये दिल्ली और बेंगलुरु में स्थित क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र हैं।
ऐसे पाठ्यक्रम जो आरएसी द्वारा अनुमोदित नहीं हैं, क्या आरटीआई उन्हें संचालित करता है?
हां, मुख्यालय और उपयोगकर्ता कार्यालयों द्वारा वांछित अतिरिक्त पाठ्यक्रम आरटीआई द्वारा संचालित किए जाते हैं। हालांकि, इन पाठ्यक्रमों को आरएसी द्वारा बाद की बैठक में अनुमोदित किया गया है।
क्षेत्रीय सलाहकार समिति क्या है?
यह "क्षेत्रीय सलाहकार समिति" है जिसमें सभी उपयोगकर्ता कार्यालयों के साथ-साथ हमारे मुख्यालय प्रशिक्षण विंग के सदस्य प्रतिनिधि शामिल हैं। यह समिति साल में दो बार मिलती है, आम तौर पर फरवरी / मार्च और सितंबर / अक्टूबर के महीनों में। RAC, RTI के लिए "वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर" को अंतिम रूप देता है।
IA और AD में काम करने वाला व्यक्ति प्रशिक्षण के लिए कैसे नामांकित होता है?
क्षेत्रीय सलाहकार समिति द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रमों के लिए उपयोगकर्ता कार्यालयों द्वारा नामांकन किया जाता है।
क्या IAAD में काम नहीं करने वाला कोई अधिकारी / कार्मिक क्षेत्रीय सलाहकार समिति जयपुर में प्रशिक्षित हो सकता है?
नहीं, यह संस्थान केवल भारतीय लेखापरीक्षा और लेखा विभाग के तहत काम करने वाले कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है।
क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान,जयपुर, जयपुर के उपयोगकर्ता कार्यालय कौन से हैं?
आज तक, संस्थान मुख्य रूप से राजस्थान और दिल्ली राज्यों में स्थित 22 कार्यालयों (सामान्य कार्यक्रमों और ईडीपी कार्यक्रमों के लिए) की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करता है।
क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान में किसे प्रशिक्षित किया जाता है?
यह संस्थान कुछ विशेष पाठ्यक्रम में ग्रुप ए (समूह के अधिकारियों सहित), उपयोगकर्ता कार्यालयों के ग्रुप बी और सी स्टाफ के साथ-साथ भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के अन्य कार्यालयों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करता है।
अन्य आरटीआई कहाँ स्थित हैं ?
अन्य आरटीआई यहां स्थित हैं: इलाहाबाद, चेन्नई, हैदराबाद, जम्मू, नागपुर, कोलकाता, मुंबई, रांची और शिलांग
क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान, जयपुर कब अस्तित्व में आया?
फरवरी 1986 में क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान, जयपुर अस्तित्व में आया
क्या आरटीआई उन पाठ्यक्रमों का संचालन करता है जो आरएसी द्वारा अनुमोदित नहीं हैं?
हां, मुख्यालय और उपयोगकर्ता कार्यालयों द्वारा वांछित अतिरिक्त पाठ्यक्रम आरटीआई द्वारा संचालित किए जाते हैं। हालांकि, इन पाठ्यक्रमों को आरएसी द्वारा बाद की बैठक में अनुमोदित किया जाता है।
आर ए सी क्या है?
आर ए सी का अर्थ "क्षेत्रीय सलाहकार समिति" है, जिसमें सभी उपयोगकर्ता कार्यालयों के साथ-साथ हमारे मुख्यालय प्रशिक्षण विंग के सदस्य प्रतिनिधि शामिल हैं। यह समिति साल में दो बार मिलती है, आम तौर पर फरवरी / मार्च और सितंबर / अक्टूबर के महीनों में। आर ए सी आर टी आई के लिए "वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर" को अंतिम रूप देता है।
अन्य आर टी आई कहाँ स्थित हैं?
अन्य आरटीआई : जम्मू , चेन्नई, हैदराबाद, जयपुर, नागपुर, कोलकाता, मुंबई, रांची तथा शिलांग में स्थित हैं
क्या कोई अधिकारी / कर्मचारी जो भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग में कार्यरत नहीं है, आरटीआई इलाहाबाद में प्रशिक्षण ले सकता है?
नहीं, यह संस्थान केवल भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग में काम करने वाले कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है।
आर टी आई,इलाहाबाद के उपयोगकर्ता कार्यालय कौन से हैं?
उत्तरप्रदेश तथा उतराखंड में स्थित भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के कार्यालय आरटीआई, इलाहाबाद के उपयोगकर्ता कार्यालय हैं। इस प्रकार,आरटीआई, इलाहाबाद के 19 उपयोगकर्ता कार्यालय हैं।
आर टी आई में किसे प्रशिक्षित किया जाता है?
यह संस्थान उपयोगकर्ता कार्यालयों के समूह ए (समूह अधिकारियों सहित), समूह बी और समूह सी के कर्मचारियों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करता है। तथा यह संस्थान कुछ विशेष पाठ्यक्रम के लिए विभाग के अन्य कार्यालयों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को भी पूरा करता है।
क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान, इलाहाबाद अस्तित्व में कब आया?
क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान, इलाहाबाद का अस्तित्व 11 अगस्त 1986 में आया।
भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग में कार्यरत अधिकारी / कर्मचारी को प्रशिक्षण के लिए कैसे नामित किया जाता है?
क्षेत्रीय सलाहकार समिति द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रमों के लिए उपयोगकर्ता कार्यालयों द्वारा अधिकारियों / कर्मचारियों का नामांकन किया जाता है।
क्या कोई अधिकारी / कर्मचारी जो भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग में कार्यरत नहीं है, आरटीआई जम्मू में प्रशिक्षण ले सकता है?
नहीं, यह संस्थान केवल भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग में काम करने वाले कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करता है।
आर टी आई, जम्मू के उपयोगकर्ता कार्यालय कौन से हैं?
जम्मू और कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और चंडीगढ़ (केंद्र शासित प्रदेश) में स्थित भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के कार्यालय आरटीआई, जम्मू के उपयोगकर्ता कार्यालय हैं। इस प्रकार,आरटीआई, जम्मू के 14 उपयोगकर्ता कार्यालय हैं।
आर टी आई में किसे प्रशिक्षित किया जाता है?
यह संस्थान उपयोगकर्ता कार्यालयों के समूह ए (समूह अधिकारियों सहित), समूह बी और समूह सी के कर्मचारियों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को पूरा करता है।
तथा यह संस्थान कुछ विशेष पाठ्यक्रम के लिए विभाग के अन्य कार्यालयों की प्रशिक्षण आवश्यकताओं को भी पूरा करता है।
अन्य आर टी आई कहाँ स्थित हैं?
अन्य आरटीआई इन स्थानों पर स्थित हैं:
इलाहाबाद, चेन्नई, हैदराबाद, जयपुर, नागपुर, कोलकाता, मुंबई, रांची तथा शिलांग
क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान, जम्मू अस्तित्व में कब आया?
क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान, जम्मू का उद्घाटन दिसंबर 1989 में भारत के सातवें नियंत्रक और महालेखा परीक्षक श्री टी एन चतुर्वेदी द्वारा किया गया था।
आर टी आई क्या है?
"क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान"। आरटीआई जम्मू भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के नौ क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है।
भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के अन्य क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान कहाँ स्थित हैं?
अन्य आरटीआई यहां स्थित हैं:
इलाहाबाद, जम्मू, हैदराबाद, जयपुर, नागपुर, कोलकाता, मुंबई, रांची और शिलांग
RAC क्या है?
यह "क्षेत्रीय सलाहकार समिति" है जिसमें सभी उपयोगकर्ता कार्यालयों के साथ-साथ हमारे मुख्यालय प्रशिक्षण विंग के सदस्य प्रतिनिधि शामिल हैं। यह समिति साल में दो बार मिलती है, आम तौर पर फरवरी / मार्च और सितंबर / अक्टूबर के महीनों में। आरएसी उपयोगकर्ता कार्यालयों द्वारा निर्दिष्ट प्रशिक्षण की आवश्यकता विश्लेषण के आधार पर आरटीआई के लिए "वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर" को अंतिम रूप देता है। वे बैठकों के दौरान इस प्रशिक्षण संस्थान के कामकाज की समीक्षा भी करते हैं।
भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग (IA & AD) में काम करने वालों को प्रशिक्षण के लिए क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान, चेन्नई में कैसे नामित किया जाता है?
क्षेत्रीय सलाहकार समिति द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रमों के लिए उपयोगकर्ता कार्यालयों द्वारा नामांकन किया जाता है।
हम कौन है?
क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान (RTI), चेन्नई भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग (IA & AD) के दस क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है।
आर टी आई क्या है?
"क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान"। आरटीआई इलाहाबाद भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के नौ क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है।
क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान क्या है?
क्षेत्रीय प्रशिक्षण संस्थान (RTI)। यह जयपुर में स्थित है। यह भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग के अंतर्गत आता है। इस विभाग में कुल दस आरटीआई हैं और दो क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र (आरटीसी) "दिल्ली और बंगलौर"।
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आईएएंडएडी कैसे संगठित किया गया है?
सीएजी का कार्यालय, नई दिल्ली लेखापरीक्षा, लेखा और आईएएंडएडी के हकदारी कार्यों से संबंधित सभी गतिविधियों को निदेशित, मॉनीटर और नियंत्रित करता है। क्षेत्रीय स्तर पर 133 कार्यालय है:
- प्रत्येक राज्य में महालेखाकार/लेखापरीक्षा का कार्यालय लेखापरीक्षा के लिए उत्तरदायी है,
- राज्य लेखे के संकलन के लिए हकदारी का पालन करने के लिए महालेखाकार (ले. व ह.) का कार्यलय,
- सभी सिविल मंत्रालयों और विभागों रक्षा, रेलवे, डाक और दूरसंचार सहित संघ गतिविधियों की लेखापरीक्षा हेतु प्रधान निदेशक लेखापरीक्षा उत्तरदायी है,
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की लेखापरीक्षा का कार्य सदस्य लेखापरीक्षा बोर्ड के कार्यालय को सौंपा गया है।
- विदेशों में भारतीय मिशन की लेखापरीक्षा के लिए विदेश स्थित कार्यालय।
सीएजी अपनी भूमिका कैसे निभाता है?
सीएजी का अपनी संविधानात्मक भूमिका को निभाने के लिए भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएंडएडी) द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। आईएएंडएडी के शीर्ष और मध्यर प्रबंधकीय स्तर पर लगभग 600 भारतीय लेखा और लेखापरीक्षा सेवा (आईएएंडएएस) अधिकारी हैं। उन्हें या तो यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा द्वारा सीधे नियुक्त किया जाता है या ग्रुप बी (पर्यवेक्षण स्टाफ) से पदोन्नत कर शामिल किया जाता है। कुछ अधीनस्थ संवर्ग भी है जिनकी संख्याै लगभग 47000 है। इसमें राजपत्रित पर्यवेक्षण संवर्ग (ग्रुप बी) में वरिष्ठव लेखापरीक्षा/लेखाअधिकारी, लेखापरीक्षा अधिकारी और सहायक लेखापरीक्षा अधिकारी तथा सहायक स्टाफ संवर्ग (ग्रुप सी) शामिल हैं।
लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों का क्या होता हैं?
संघ के मामले में सीएजी के प्रतिवेदन राष्ट्रशपति को और राज्य मामले में राज्यपाल को प्रस्तुत किये जाते हैं जो उन्हें सदन के समक्ष प्रस्तुत करता है। एक बार सदन में प्रस्तुत किये जाने के बाद, प्रतिवेदन लोक लेखा समिति (पीएसी)/लोक उपक्रम समिति (कोपू) की केंद्रीय और राज्य स्थाई समितियों को स्थाई रूप से संदर्भित हो जाते हैं। ये विशिष्टम समितियां वार्षिक लेखे और उनपर लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की समयबद्ध और गहन संवीक्षा उपलब्ध करवाने के लिए गठित की गई हैं। समितियां लोक हित के सर्वाधिक महत्वपूर्ण निष्कीर्षों और सिफारिशों को हमारे प्रतिवेदनों से चुनते है और उन पर अपनी सुनवाईयों रखते हैं। हम इस कार्य में इन समितियों को अपना तकनीकी सहायता करते हैं। समितियों की सुनवाईयों पर, कार्रवाई/गैर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार कार्यकारी को बुलाया जा सकता है। उनकी जांच के आधार पर, समिति अपने प्रतिवेदन तैयार करते है और विधान मंडल को प्रस्तुत करते है जो समिति की सुनवाईयों, कार्यकारी द्वारा की गई कार्रवाई और प्रशासनिक प्रथाओं और कार्यप्रणालियों को सुधारने के लिए सिफारिशों को शामिल कर सारबद्ध करती है।
हमारे प्रतिवेदन का केंद्र बिंदु क्या है?
लेखापरीक्षा प्रतिवेदन में अंतिम, पूर्णत: परिपुष्टे लेखापरीक्षा निष्क र्ष होते हैं। ये विभाग द्वारा स्वीकृत की गई है और/या तथ्यातत्मक रूप से साबित की गई और विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए काफी महत्वपूर्ण है। हमारी लेखापरीक्षा का उद्देश्य प्रबंधन में और सरकारी गतिविधियों और कार्यक्रमों में सुधार करना है। हम पहचानी गई त्रुटियों की प्रकृति को सुनिश्चिनत करते हैं कि वे एकाकी या पुनरावर्ती प्रकार की है। हम न केवल सुधारात्मक कार्रवाई को प्रेरित करना चाहते हैं अपितु यह भी सुनिश्चितत करना चाहते हैं कि दोबारा गलती न दोहराई जाये। हम कार्यप्रद्धति, प्रक्रियाएं और प्रसंस्करणों को सुधारने के लिए उचित, सूचित और कार्यान्वयन योग्य सिफारिशें करते हैं।
किस प्रकार के प्रतिवेदन सीएजी प्रस्तुत करता है?
संसद और राज्य विधान मंडलों में प्रस्तुत की गई सीएजी की लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों में राजस्व संग्रहण और सरकार के व्यय को कवर करते हुए अनुपालना और निष्पाईदन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, विधान द्वारा प्रावधान किए गए कुछ स्वायत्त निकायों की कार्य प्रणाली पर पृथक लेखापरीक्षा प्रतिवेदन, संघ और राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति पर प्रतिवेदन और संसद और विधान मंडलों द्वारा पारित किये गये विनियोजन अधिनियमों के अनुपालन पर प्रतिवेदन शामिल होते हैं। सीएजी राज्य विधान मंडलों में राज्यों के प्रमाणित वार्षिक लेखे भी प्रस्तुत करता है जिन्हें वित्त और विनियोजन लेखे कहा जाता है।
हम कितने प्रकार के लेखापरीक्ष करते हैं?
लेखापरीक्षा के उद्देश्योंक के आधार पर हम सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा को निम्नलिखित में वर्गीकृत करते है:
- अनुपालन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
- वित्तीय सत्यापन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
- निष्पायदन लेखापरीक्षा (कालैस्पबल लिंक में अलग से विवरण किया गया है)
- इन परम्परागत लेखापरीक्षा के अतिरिक्त, हम सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रणाली और पर्यावरण मामलों पर भी कई सफल लेखापरीक्षा कर चुके हैं।
हम किसकी लेखापरीक्षा करते हैं?
सीएजी की लेखापरीक्षा के अंतर्गत आने वाले संगठन हैं:-
- भारतीय रेल, रक्षा और डाक और दूरसंचार सहित सभी संघ और राज्य सरकार विभाग।
- संघ और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित लगभग 1500 सार्वजनिक वाणिज्यक उद्यम जैसे सरकारी कंपनियां और निगम।
- संघ और राज्य सरकार द्वारा नियंत्रित और स्वामित्व वाले लगभग 400 गैर वाणिज्यिक स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण।
- संघ से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकायों और प्राधिकरणों जैसे स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं जो विकास कार्यक्रमों के कार्यावयन और सेवाऐं प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण आरंभिक स्तर की एजेंसिया हैं।
अपनी भूमिका निभाने के लिए सीएजी की क्या शक्तियां है?
उनके विस्तृत लेखापरीक्षा अधिदेश का प्रयोग निर्बाध रूप से करने के क्रम में अधिनियम का प्रावधान करता है:
- उनके लेखापरीक्षा के अधीन किसी कार्यालय या संगठन के निरीक्षण करने की शक्ति।
- सभी लेन-देनों की जांच और कार्यकारी से प्रश्नष करने की शक्ति।
- किसी भी लेखापरीक्षित सत्त्व से कोई भी रिकार्ड, पेपर, दस्तावेज मांगने की शक्ति।
- लेखापरीक्षा की सीमा और स्व रूप पर निर्णय लेने की शक्ति।
सीएजी के क्या कर्त्तव्य है?
जैसा संविधान के अनुच्छेद 149 में उल्लेखित है संसद ने 1971 में सीएजी के कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें अधिनियम नामक एक विस्तृत विधान को अधिनियमित किया जो उनके अधिदेश का वर्णन करता है और सरकार (केंद्र और राज्य) के लगभग प्रत्येक व्यय राजस्व संग्रहण या सहायता/अनुदान प्राप्त करने वाली इकाई उनकी लेखापरीक्षा के अंतर्गत आती हैं। उनका कर्तव्य अग्रलिखित की लेखापरीक्षा करना और उस पर रिपोर्ट तैयार करना है:
- संघ और राज्य सरकार के कोष (समेकित निधि) से संबंधित सभी प्राप्तियां और इस से किये गये व्यय।
- आकस्मिक व्यय (आकस्मिक निधि) और सरकार द्वारा धारित लोक धन उदाहरणत: केंद्र सहित राज्य स्तर पर डाक बचत, विकास पत्र (लोक लेखा) से संबंधित सभी लेन-देन।
- किसी भी सरकारी विभाग में रखे गये सभी व्यापार, उत्पादन, लाभ और हानि खाते, तुलन पत्र और अन्य सहायक खाते।
- सभी सरकारी कार्यालयों और विभागों के सभी स्टोर और स्टॉक खाते।
- सभी सरकारी कंपनियों और निगमों जैसे ओएनजीसी, सेल आदि के खाते।
- सरकारी धन प्राप्त करने वाले सभी स्वायत्त निकाय और प्राधिकरण जैसे नगर, आईआईएमज़, आईआईटीज़, राज्य स्वास्थ्य संस्थाओं के खाते।
- राष्ट्रापति राज्यपाल के अनुरोध या उनके अपनी पहल पर किसी निकाय या प्राधिकरण के खाते।
अधिनियम राज्य सरकारों द्वारा अनुरक्षित सहायक खातों से राज्य सरकारों के खातों के संकलन का प्रावधान करता है।
सीएजी की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चियत की गई है?
संविधान निम्नलिखित रूप से सीएजी द्वारा लेखापरीक्षा की स्वतंत्र और निष्परक्ष प्रकृति के लिए सक्षम बनाता है:
- भारत के राष्ट्र पति द्वारा सीएजी की नियुक्ति
- पदच्यूति हेतु विशेष प्रक्रिया (जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश)
- भारत की समेकित निधि से वेतन और प्रभारित व्यय (दत्त मत)
- उनकी कार्य अवधि समाप्त होने के बाद किसी अन्य सरकारी कार्यालय में कार्य करने की अनुमति न होना।
हम कौन है?
प्रजातन्त्र में जिनके पास शक्तियां और जिम्मेदारियां होती है वे अपने कार्यों के प्रति जवाहदेह होने चाहिए। इस उद्देश्य हेतु संविधान ने कई संस्थागत तंत्र जैसे न्यायापालिका, सर्तकता निकाय और एक स्वतंत्र सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था (साई) को अधिदेशित किया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक और भारतीय लेखा तथा लेखापरीक्षा विभाग (आईएएडी) इसके अंतर्गत कार्य करते हुए भारतीय सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्था को गठित करते हैं। भारत के संविधान ने हमें राष्ट्र के लेखापरीक्षक के रूप में अधिदेशित किया है। इस प्रकार हम जिम्मेदारी सुनिश्चिात करने के लिए एक यंत्र हैं। सविधान का अनुच्छेद 149-151 सीएजी की विशेष भूमिका निर्धारित करती है।